देवरिया। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी (Heatwave) के बीच मौसम विभाग ने राहत भरी खबर दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (South-West Monsoon) तय समय से पहले केरल पहुंच सकता है। अनुमान है कि मॉनसून 26 मई तक केरल में दस्तक दे सकता है, जो सामान्य तारीख 1 जून से करीब पांच दिन पहले है। जिसके बाद धीरे-धीरे देश के बाकी राज्यों में मानसून दस्तक देगा। हालाकी आने वाले दिनों में भीषण गर्मी और हीटवेव का अलर्ट भी जारी किया गया है।

अंडमान-निकोबार की ओर तेजी से बढ़ रहा मॉनसून

मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की हवाएं बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी हिस्सों, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक पहुंच सकती हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने मजबूत कम दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) की वजह से मॉनसून की रफ्तार तेज हुई है। यही कारण है कि अंडमान-निकोबार में भी मॉनसून सामान्य समय से लगभग छह दिन पहले पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

केरल में मॉनसून की एंट्री पर क्या है अनुमान?

भारत में हर साल 1 जून को केरल में मॉनसून के आगमन की सामान्य तारीख मानी जाती है। हालांकि इस बार मौसम विभाग ने 26 मई के आसपास मॉनसून पहुंचने का अनुमान जताया है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि मॉनसून की तारीख में चार दिन आगे या पीछे होने की संभावना बनी रहती है।

अल नीनो का दिख सकता है असर

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल जुलाई से अल नीनो (El Nino Effect) का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। इसके चलते वर्षा के पैटर्न में बदलाव आने की आशंका है। विशेषज्ञों ने ऐसे हालात में वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बेहद जरूरी बताया है ताकि भविष्य में पानी की कमी जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

मॉनसून का अनुमान कैसे लगाया जाता है?

मॉनसून की भविष्यवाणी के दौरान मौसम विभाग कई अहम संकेतकों का अध्ययन करता है। इनमें उत्तर-पश्चिम भारत का न्यूनतम तापमान, दक्षिण भारत में प्री-मानसून बारिश, चीन सागर के ऊपर विकिरण, हिंद महासागर की हवाएं और दक्षिण-पश्चिम प्रशांत महासागर की परिस्थितियां शामिल होती हैं।

IMD का रिकॉर्ड रहा काफी सटीक

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा केरल में मॉनसून आगमन को लेकर किए गए अनुमान पिछले कई वर्षों में काफी सटीक साबित हुए हैं।  2005 से 2025 के बीच जारी पूर्वानुमानों में केवल वर्ष 2015 ऐसा रहा जब अनुमान पूरी तरह सही नहीं रहा। पिछले साल भी मॉनसून तय समय से पहले केरल पहुंच गया था।