देवरिया। देश में एक बार फिर (Petrol Diesel Price Hike) ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मई 2026 में कई शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर आम जनता के बजट के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के खर्चों पर भी पड़ रहा है।
कोरोना काल के बाद तेजी से बढ़े ईंधन के दाम
गौरतलब है कि साल 2020 के बाद कोरोना महामारी और वैश्विक सप्लाई संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला था। इसी दौर में भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल महंगे होने लगे।साल 2021 में देश के कई शहरों में पहली बार पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई थी। इसके बाद भी ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार जारी रहा।
ग्लोबल संकट का भारत पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि (Global Supply Crisis) और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर भारत के ईंधन बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर सीधे आम लोगों तक पहुंच रहा है।पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ रही है। इसका असर खाने-पीने की चीजों, किराए और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। (Fuel Price News) के बीच लोग सरकार से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं।