देवरिया: दुनिया हर साल 26 अगस्त को महिला समानता दिवस (Women’s Equality Day) के रूप में सेलीब्रेट करती है। ये दिन महिलाओं के अधिकारों की चर्चा का दिन होता है। आधी आबादी, जो आज भी अपने पूरे हक के लिए संघर्ष कर रही है। शिक्षा का अधिकार, आर्थिक और सामाजिक समानता का अधिकार, इतनी दूर क्यों जाना पैदा होने के अधिकार के साथ-साथ जन्म पर माता-पिता की खुशी का अधिकार पाना भी औरतों की विशेष उपलब्धियों की लिस्ट का हिस्सा होना चाहिए। हर साल महिला समानता दिवस किसी न किसी थीम के साथ मनाया जाता है। इस दिन के इतिहास और जरूरत पर बात करने से पहले इस साल की थीम के बारे में बताते हैं। 2022 के Women’s Equality Day की थीम ‘सेलिब्रेटिंग वूमेंस राइट टू वोट’ (Celebrating women’s right to vote) है।

इतिहास और उद्देश्य
समानता के अधिकार के लिए ये लड़ाई सबसे पहले अमेरिका में महिलाओं ने शुरू की। उस वक्त पश्चिमी देशों में भी महिलाओं को बहुत कम अधिकार थे। साल 1971 में अमेरिकी संसद ने 26 अगस्त को महिला समानता दिवस के रूप में मनाने का एलान किया। अमेरिका में सबसे पहले ये दिन सेलीब्रेट किया गया और धीरे-धीरे पूरी दुनिया इसे मनाने लगी। महिला समानता दिवस मनाने का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के विरुद्ध जागरूक करना है।

लंबे संघर्ष से हासिल किए अधिकार
आज पूरे विश्व में महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। बड़े से बड़े पदों को सुशोभित कर रही हैं। खेल से लेकर जंग के मैदान तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। सरकार बनाने के लिए मतदान कर रही हैं। लेकिन ये सब एक लंबे संघर्ष का हासिल है। पुरुषों के सामने हमेशा दोयम समझी जाने वाली आधी आबादी सीमित अवसरों में भी सोने जैसी चमकी। अवरोध बने समाज के आगे घुटने नहीं टेके और लड़ते-लड़ते आज ढाल की तरह खड़ी हो गई है।

हर कदम पर खुद को साबित करती महिलाएं
महिलाएं भले आज भी कितने मुकाम हासिल कर लें लेकिन आज भी मोहल्ले की गलियों में छेड़छाड़ हो या ऑफिस में ‘औरत हैं इनके बहाने हैं’ जैसे ताने आम बात है। रंग-रूप को लेकर आज भी बेटियों को सुना दिया जाता है। क्या करोगी कमा कर बता दिया जाता है। सैलरी और संपत्ति पर अधिकार की बात करना मुश्किल है और हिस्सा मांगना कभी सिखाया नहीं जाता है। शिक्षा के लिए आज भी घर पर लड़ना आम बात है। सबसे पहले समाज को महिलाओं को ऐसी हवा देनी होगी, जहां वे इन छोटी-छोटी चीजों के लिए बिना लड़े सांस ले सकें। जहां वे अपने स्वास्थ्य, शिक्षा और संपत्ति के बारे में बात कर सकें। जहां उन्हें हर कदम पर खुद को साबित न करना पड़े।

महिला समानता दिवस पर आइए हम प्रण लें कि ऐसा समाज बनाएंगे, जहां कन्या भ्रूण हत्या सुनने को न मिले। कोई बेटी शिक्षा से वंचित न रहे। हर औरत को उत्तम स्वास्थ्य सुविधा मिले। समान सैलरी और संपत्ति का अधिकार मिले। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर लगाम लगे और हम ये कह सकें कि बेटी है, सबकुछ कर सकती है। महिला समानता दिवस की शुभकामनाएं।
http://newsdeoria.com/this-festival-season-add-handloom-to-your-wardro/
