देवरिया। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने  (West Bengal Election Result 2026) ने भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव कर दिया है। लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले बंगाल में इस बार भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सत्ता की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है। इस बार के चुनावों में आई भाजपा की सुनामी ने सालों से खड़े टीएमसी के किलो को पूरी तरह से ढहा दिया है।

210 सीटों के साथ BJP की प्रचंड जीत

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी (BJP Victory Bengal) ने 294 में से 210 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) केवल 77 सीटों पर सिमट गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत को “सुशासन की जीत” बताया और बंगाल की जनता का आभार जताया।

भवानीपुर से ममता बनर्जी की हार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee Lost Election) को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है।भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari Win) ने भवानीपुर सीट पर उन्हें 15,114 वोटों से हराया। इससे पहले भी 2021 में नंदीग्राम में ममता को हार का सामना करना पड़ा था।

रणनीति और प्रदर्शन बना जीत की वजह

विश्लेषकों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों, आदिवासी इलाकों और औद्योगिक बेल्ट में बीजेपी का प्रदर्शन शानदार रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता ने टीएमसी के ‘मा-माटी-मानुष’ नारे को पीछे छोड़ दिया।

TMC ने नतीजों पर उठाए सवाल

नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपात और कुछ इलाकों में नतीजे रोकने के आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने ईवीएम (EVM Issue) में गड़बड़ी का दावा भी किया, हालांकि रुझानों ने साफ कर दिया कि इस बार वापसी मुश्किल थी।

BJP नेताओं ने जताया आभार

सिलीगुड़ी से भाजपा उम्मीदवार शंकर घोष ने जीत के बाद जनता का धन्यवाद किया और इसे ऐतिहासिक जनादेश बताया। वहीं कूचबिहार से विजयी निसिथ प्रमाणिक ने कहा कि जनता ने कानून व्यवस्था से नाराज होकर बदलाव का फैसला किया है।

विपक्ष और सत्ता पक्ष में बयानबाजी तेज

दिल्ली में भाजपा सांसद वी डी शर्मा ने ममता बनर्जी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए और अब बंगाल विकास के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026 (West Bengal Election Result 2026) को इस साल का सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है। इन नतीजों के साथ ही राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत होती दिखाई दे रही है।