देवरिया। उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 (UP Census 2027 Self Enumeration) को लेकर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। इस बार पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। पहले चरण में 7 मई से 21 मई तक स्वगणना (Self Enumeration) होगी, जबकि 22 मई से 22 जून तक हाउस सर्वे (House Survey) किया जाएगा।

पहली बार डिजिटल जनगणना

जनगणना विभाग के अनुसार, इस बार लोगों को अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन भरने का मौका दिया जा रहा है। इससे प्रक्रिया आसान और तेज होने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल जनगणना (Digital Census India) से डेटा अधिक सटीक और पारदर्शी रहेगा।

सरकारी दफ्तरों में बनेंगी सुविधा डेस्क

स्वगणना को बढ़ावा देने के लिए राज्यभर में सरकारी दफ्तरों और कार्यालयों में सुविधा डेस्क (Help Desk) बनाई जाएंगी। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकें।

रोजाना 10-15 लाख फीडिंग का लक्ष्य

जनगणना विभाग ने स्वगणना के दौरान हर दिन 10 से 15 लाख एंट्री का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले बिहार में रोजाना करीब 3 लाख लोगों ने स्वगणना की थी, जबकि यूपी में इससे कहीं ज्यादा संख्या का लक्ष्य रखा गया है।

5.25 लाख कर्मचारियों की ड्यूटी

जनगणना को समय पर पूरा करने के लिए करीब 5.25 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। इनमें मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, तहसीलदार, मास्टर ट्रेनर और फील्ड ट्रेनर शामिल होंगे।

दूसरे चरण में जातिगत जनगणना

जनगणना के दूसरे चरण में फरवरी 2027 से जाति और धर्म से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। हालांकि इन सवालों का प्रारूप अभी तय नहीं किया गया है। 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे देश की कुल जनसंख्या के आंकड़े जारी किए जाएंगे।

ऐसे करें स्वगणना

  • सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट www.se.census.gov.in पर जाएं
  • राज्य में उत्तर प्रदेश (UP) चुनें और कैप्चा भरें
  • परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें
  • OTP डालकर सत्यापन करें
  • अपना पूरा पता और लोकेशन मैप पर मार्क करें
  • परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी भरें
  • जानकारी को जांचकर फाइनल सबमिट करें
  • सबमिट करने के बाद आपको 11 अंकों की SE ID मिलेगी

स्वगणना के फायदे

  • अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी जानकारी भर सकते हैं
  • खुद डेटा भरने से गलतियों की संभावना कम होती है
  • SE ID के जरिए वेरिफिकेशन प्रक्रिया तेज और आसान हो जाती है