फुटबॉल स्टार पेलेफुटबॉल स्टार पेले

देवरिया : ब्राजील के फुटबॉल स्टार पेले (Pele) की 82 साल की उम्र में कैंसर से मौत हो गई है। वे पिछले कुछ समय से साओ पाउलो के अल्बर्ट आइंस्टीन अस्पताल में भर्ती थे। एडसन अरांतेस डो नैसिमेंटो (पेले) तीन बार विश्व कप जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी थे। उन्होंने ब्राजील के लिए 1958, 1962 और 1970 में फीफा विश्व कप जीता था। उन्होंने कहा था, ‘मैं फुटबॉल खेलने के लिए पैदा हुआ था, ठीक वैसे ही जैसे बीथोवेन संगीत लिखने के लिए और माइकल एंजेलो पेंट करने के लिए पैदा हुए थे।’ उनके निधन पर दुनियाभर से लोग ट्वीट कर शोक जता रहे हैं।

सात दिन का शोक की घोषणा

पेले की मौत पर भारतीय फुटबॉल संघ ने भी ट्वीट कर शोक जताया है। साथ ही सात दिन का शोक घोषित किया है।

अखिल भारतीय फुटबॉल संघ के संयुक्त सचिव कल्याण चौबे और महासचिव शाजी प्रभाकरन ने भी संवेदना प्रकट की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि पीढ़ियां पेले जैसे दिग्गज खिलाड़ी को खेलता देख कर बड़ी हुई हैं। उन्होंने एक युद्ध को भी रोक दिया ताकि लोग उसे खेलते हुए देख सकें। फुटबॉल खेल के राजा ने वास्तव में खेल की भावना को मूर्त रूप दिया और उनकी यादें पीढ़ियों तक हमे समृद्ध करती रहेंगी।

ओबामा ने किया याद

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी पेले की मौत पर ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, पेले फुटबॉल खेलने वाले महानतम खिलाड़ियों में से एक थे। दुनिया में सबसे प्रसिद्ध एथलीटों में से एक उन्होंने लोगों को एक साथ लाने के लिए खेल की शक्ति को समझा। हमारी संवेदनाएं उनके परिवार और उन सभी के साथ हैं, जो उन्हें प्यार करते थे और उनकी प्रशंसा करते थे।

सात साल पहले भारत आए थे पेले
पेले अक्टूबर 2015 में भारत दौरे पर आए थे। इस दौरान वो पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा में शामिल हुए थे। पेले ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर सौरव गांगुली से भी मुलाकात की थी। पेले ने कहा था, ‘मुझे भारत के लोग बहुत पसंद हैं। बता दें कि इससे पहले पेले (Pele) 1977 में पहली बार भारत आए थे। तब उन्होंने न्यूयॉर्क कोस्मोस की टीम में मोहन बागान के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डन्स में मैच खेला था।

गरीबी से निकला था पेले

23 अक्टूबर सन 1940 को ब्राजील के मिनास गेराइस में पैदा होने वाले पेले ने गरीबी के दिन भी देखे। पेले ने चाय की दुकानों में वेटर के रूप में भी काम कियाा। पेले का निकनेम डिको था, लेकिन स्थानीय फुटबॉल क्लब के गोलकीपर बिले की वजह से उनका नाम पेले पड़ गया। बचपन में डिको यानी कि पेले को कई मुकाबलों में गोलकीपर की भूमिका भी निभानी होती थी। जब वे शानदार बचाव करते थे तो फैन्स कहते थे कि यह दूसरा बिले है। देखते-देखते ये बिले, पेले में बदल गया।

पेले में गजब का टैलेंट था…

5 फुट आठ इंच लंबे पेले में गजब का टैलेंट था। वह 11 सेकंड में 100 मीटर दौड़ सकते थे। वह किसी भी पैर से शूट कर सकते थे और लंबे कद काठी के डिफेंडर्स को पछाड़ सकते थे। उन्होंने प्रोफेशनल करियर में कुल 1363 मैच खेले और 1281 गोल दागे। ब्राजील के लिए उन्होंने 92 मैचों में 77 गोल दागे। 19 नवंबर 1969 को पेले ने अपना 1000वां गोल दागा था।