देवरिया। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में अब सुरक्षा की कमान नारी ‘शक्ति’ के हाथों में होगी। बस्तर तो जितना समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सुरंदरता के लिए जाना जाता है, नक्सलवाद वहां की उतनी ही बड़ी समस्या है। अब इसी नक्सली इलाकों में नक्सलियों का सामना करने के लिए 280 महिला बस्तर फाइटर्स तैयार हो चुकी हैं। ट्रेनिंग इयर 2022-23 के दीक्षांत समारोह में सभी को शपथ दिलाई जाएगी।


बस्तर के विकास के लिए विशेष बल का गठन

बस्तर संभाग का विकास और वहां के आदिवासियों को मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश सरकारें करती रही हैं। इसी उद्देश्य के साथ स्थानीय युवतियों को मौका देने के लिए ‘बस्तर फाइटर्स’ नाम से विशेष बल का गठन किया गया है। बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, बीजापुर, नारायणपुर, और कोंडागांव में बस्तर फाइटर आरक्षक के कुल 2100 पदों को स्वीकृति दी गई थी।


ज्यादातर बस्तर फाइटर्स बस्तर की ही रहने वाली हैं
280 बस्तर फाइटर्स में से ज्यादातर आरक्षक बस्तर और नक्सल इलाकों से ही हैं। इनकी नियुक्ति नक्सल इलाकों में ही होने वाली है। स्थानीय होने की वजह से इन्हें ड्यूटी के दौरान वहां के लोगों से बातचीत करने और अपनी बात समझाने में आसानी होगी। इसके साथ ही वे भौगोलिक स्थितियों को भी अच्छी तरह समझेंगी। ये सारी बातें ड्यूटी के दौरान उन्हें काफी मदद करेंगी।

थर्ड जेंडर को भी दिया गया मौका
बस्तर फाइटर्स के पद पर बस्तर की युवतियों के साथ-साथ इच्छुक थर्ड जेंडर्स को भी हिस्सा लेना का मौका दिया गया। बस्तर फाइटर्स के लिए चयनित अभ्यर्थियों को सितंबर 2022 से ही राज्य में अलग-अलग ट्रेनिंग सेंटर्स में ट्रेनिंग दी गई है। ट्रेनिंग के तहत कानूनी प्रक्रिया की जानकारी, अनुशासन, मानव अधिकारों की रक्षा, युद्ध कौशल, हथियार चलाने की विशेष ट्रेनिंग और नक्सल इलाकों के लिए खास तकनीक और सावधानियों के बारे में प्रशिक्षित किया गया।