देवरिया। भारत में नारी को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। एक तरफ महिलाओं में ममता की कोमल भावनाएं होती हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ठान लें तो उसे कर दिखाने का पर्वत सा अडिग साहस भी रखती हैं। आज हम आपको ऐसी ही दो महिलाओं के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में जानकर आपको भी गर्व होगा। उनमें से पहली हैं लद्दाख की रिगजिन चोरोल और दूसरी हैं हरवीन कौर कहलों। ये दोनों ही उन 35 महिला कैडेट्स में से हैं, जो शनिवार को चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से पास आउट हुई हैं। आइए जानते हैं 35 महिला कैडेट्स में से ये दोनों चर्चा में क्यों हैं।

पति का सपना पूरा करने के लिए बनीं आर्मी अफसर
रिगजिन चोरोल भारतीय सेना में शामिल होने वाली लद्दाख की पहली महिला होंगी। इससे पहले लद्दाख से कोई भी महिला सेना में अधिकारी के पद पर नहीं आई है। रिगजिन चोरोल के पति लद्दाख स्काउट्स की जेडांग सुंपा बटालियन में राइफलमैन थे। ड्यूटी पर हुए एक हादसे में वो शहीद हो गए थे। रिगजिन चोरोल के पति का आर्मी ऑफिसर बनने का सपना था। वो चाहते थे रिगजिन भी सेना ज्वॉइन करें। पति के देहांत के बाद उनके सपने को पूरा करने के लिए रिगजिन ने सेना ज्वॉइन की। रिगजिन इकोनॉमी में ग्रेजुएट हैं उनका कहना है कि ‘मैं अपने बच्चे की परवरिश एक गौरवशाली महौल में करना चाहती हूं। सेना में भर्ती होने का एक यह भी कारण था। मुझे यकीन है कि मेरे पति को मुझ पर बहुत गर्व होगा’।

स्कूल टीचर से आर्मी ऑफिसर बनीं हरवीन
जालंधर के एक निजी स्कूल में टीचर रहीं हरवीन ने भी ऑफिसर्स ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग पूरी कर ली है। हरवीन के पति कैप्टन कंवलपाल सिंह देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए थे। अपने पति से मिली प्रेरणा और उनके सपने को साकार करने के लिए हरवीन ने सेना ज्वॉइन की।

11 महीने बच्चों से दूर रहीं दोनों
रिगजिन और हरवीन दोनों के छोटे बच्चे हैं। चेन्नई के ट्रेनिंग अकादमी में 11 महीने की कड़ी ट्रेनिंग होती है, इस दौरान दोनों अपने बच्चों से दूर रहीं। एक मां के लिए अपने छोटे बच्चे से 11 महीने दूर रहना बहुत कठिन होता है लेकिन इन्होंने देश सेवा को सबसे ऊपर रखकर ये बलिदान भी दिया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद पासिंग आउट परेड में दोनों अपने बच्चों को गोद में लेकर लाड करते हुए दिखी। वो नजारा जितना गर्व से भरा था उतना ही भावुक भी।