देवरिया। 3 फरवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर महाकुंभ में तीसरा शाही स्नान किया गया। सोमवार को ब्रम्ह मुहुर्त से ही अखाड़े स्नान के लिए पहुंचने शुरु हो चुके थे। मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ के बाद इस बार प्रशासन ने और भी कड़े इंतजाम किए हैं। बसंत पंचमी के मौके पर संगम पर शाम तक करीब डेढ़ करोड़ लोगों ने स्नान किया है।

बसंत पंचमी पर आखिरी शाही स्नान
बसंत पंचमी का स्नान 2 फरवरी से ही शुरु हो गया था लेकिन अखाड़ों ने 3 फरवरी को स्नान किया। बसंत पंचमी महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान है। शाही स्नान के बाद कुंभ में जुटे कई अखाड़े अब अपने-अपने डेरों में लौटने की तैयारी करने लगे हैं। ये अखाड़े शाही स्नान के लिए ही कुंभ में शिविर लगाए होते हैं। शैव संप्रदाय के अखाड़े जिनके आराध्य भगवान शिव होते हैं वो महा शिवरात्री तक रुक सकते हैं।
सीएम योगी ने खुद रखा नजर
अंतिम शाही स्नान सुचारू रूप से संपन्न हो जाए इसके लिए पूरा मेला प्रशासन लगा हुआ है। इतना ही नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह साढ़े 3 बजे से सरकारी आवास के वॉर रूम में डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह और मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों के साथ बसंत पंचमी के अमृत स्नान पर लगातार अपडेट लेते रहे हैं। सीएम योगी ने स्नान से पहले ट्विट कर सभी श्रद्धालुओं को बधाई दी और कहा – “महाकुम्भ-2025, प्रयागराज में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर माँ गंगा, माँ यमुना और माँ सरस्वती की दिव्य धाराओं में पवित्र अमृत स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करने वाले सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई!
भगवान तीर्थराज सभी के मनोरथ पूर्ण करें, हमारे चिंतन एवं चेतना को सशक्त करें, विश्व का कल्याण करें, यही कामना है।”
अखाड़ों और श्रद्धालुओं पर हुई पुष्प वर्षा
बसंत पंचमी पर हुए शाही स्नान में अखाड़ों ने सज-धज कर भव्य तरीके से अपने-अपने जुलूस निकाले। सभी अखाड़े पारंपरिक तरीके से साज-सज्जा के साथ निकले थे। शाही स्नान में लगभग 5 हजार नागा साधुओं ने हिस्सा लिया। हर अखाड़े को लगभग 40 मिनट का समय स्नान के लिए दिया गया था। हर बार की तरह इस बार भी शाही स्नान का नजारा देखते ही बन रहा था। मेला प्रशासन ने अखाड़ों और स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं पर हेली कॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई। महाकुंभ के अधिकारिक एक्स हैंडल से बसंत पंचमी के स्नान पर पोस्ट किया गया।
पोस्ट में लिखा –“धर्म, संस्कृति और आस्था के महापर्व ‘महाकुम्भ 2025’ में संतों का उत्साह देखते ही बन रहा है। पूज्य संतों की उपस्थिति से महाकुम्भ नगर का वातावरण और भी भक्तिमय हो गया है।”