पीएम मोदी: जिनके नारे हिट होते हैं और अपील सुपरहिट, सिर-आंखों पर बिठा लेता है देश
कहते हैं नेता का पहला गुण होता है लोगों का प्रिय होना और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत भी होती है। हमने अपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को देखा है। उनकी एक आवाज पर देश खड़ा होता था। आजादी की लड़ाई में उनकी कही एक-एक बात भारतीयों के लिए कितनी महत्वपूर्ण थी, उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधीजी की अपील पर लोगों ने विदेशी कपड़ों और सामानों का उपयोग बंद कर विदेशी सामानों की होली जलाई थी। स्वदेशी आंदोलन, स्वतंत्रता की लड़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा था। शांति से किए जाने वाले इस आंदोलन से अंग्रेजी सरकार की नींद उड़ गई थी। लाल बहादुर शास्त्री, अटल बिहारी वाजपेयी, ज्योति बसु, राममनोहर लोहिया, इंदिरा गांधी, जयप्रकाश नारायण, सुषमा स्वराज उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें लोगों का भरपूर प्यार मिला। वैसे ये सूची बहुत लंबी है।

भारत में क्षेत्रीय राजनीति हो या केंद्र की कई ऐसे लीडर्स हुए जिनकी लोकप्रियता ने आसमान छू लिया। जनप्रिय नेताओं की लिस्ट में साल 2014 में एक ऐसा नाम जुड़ा, जिसकी लोकप्रियता में रत्ती भर भी कमी नहीं आई है। जिसके बड़े से बड़े फैसले भी देशवासियों ने कष्ट सहकर माने और जिसकी एक अपील पर पूरब से लेकर पश्चिम, उत्तर से लेकर दक्षिण तक भारत एक सूत्र में बंधा दिखा। हम बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। जिनकी एक अपील पर देश का कोना-कोना तिरंगे के रंग में रंग गया। हर घर तिरंगा अभियान ने आजादी के 75 साल का उत्सव ऐतिहासिक कर दिया।

हर जगह तिरंगा
स्वतंत्रता दिवस की 75वीं सालगिरह पर पूरा देश तीन रंगों में रंगा दिखाई दिया। गली-मोहल्ले, चौक-चौराहों, पान की दुकान, चाय के ठेले, गरीब की झोपड़ी हो या किसी रईस का बंगला चारों तरफ तिरंगा ऐसे लहराया मानों कि आंखों में सुकून की नमी और दिल में गर्व की खुशी दोनों महसूस हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव में हर घर तिरंगा की अपील की थी। इस अपील का ये असर हुआ कि देश के लगभग हर कोने में घरों, दुकानों या काम करने वाले संस्थानों में हर जगह तिरंगा ही तिरंगा नजर आया। इसमें जनभागीदारी ऐसी दिखी कि 15 अगस्त के दिन सड़कों पर वाहनों में, युवाओं के हाथों में, तरानों में हर जगह सिर्फ ही सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज ही देखने को मिला। इस तरह देशवासियों ने अमृत महोत्सव को भव्य बनाने की पीएम की मंशा को सार्थक कर दिखाया।

जनता कर्फ्यू की अपील भी हुई थी सफल
ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब पीए नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से कुछ अपील की हो और जनता ने उसे माना हो। कोरोना काल में भी पीएम की एक अपील पर लोगों ने एक दिन के लिए खुद को पूरी तरह से घर पर ही रखा था और पीएम की जनता कर्फ्यू की अपील को माना था। पहले शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा जब सिर्फ एक शख्स की अपील पर बिना किसी बल प्रयोग किए शहरों की सड़कें, गली और चौक-चौराहे सूने पड़ गए हों। इसे मोदी की लोकप्रियता ही कहेंगे कि उनकी हर अपील देश पर असर करती है।

कोरोना के दौरान लोगों ने पीएम की अपील मानी
कोरोना काल में ही पीएम ने जनता से एक साथ एक समय पर थाली बजाने के अपील की थी। पीएम के कहे अनुसार ठीक 5 बजे चारों तरफ से थाली, घंटी, शंख आदि की आवाज सुनाई देने लगी थी। भारत की सवा करोड़ जनता में आधी से अधिक आबादी गांवों में निवास करती है। ये नागरिक भले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर प्रधानमंत्री से दूर हैं लेकिन उनके शब्दों से नहीं। भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला और विविधता से भरा देश है। यहां लोगों को एक आवाज पर एक सूत्र में पिरोना बड़ी बात है, जो कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दिखाया है।

शास्त्री जी ने की थी उपवास की अपील
देश में पहले भी ऐसा हुआ है कि जनता ने किसी प्रधानमंत्री की अपील पर देशहित के लिए देश के लोगों ने बड़ा फैसला लिया हो। वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध दौरान प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉन्सन ने धमकी दी थी कि अगर भारत, पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई बंद नहीं करता तो अमेरिका, भारत को गेहूं का निर्यात बंद कर देगा। उस समय इस परिस्थिति से निपटने के लिए शास्त्री जी ने जनता से अपील की कि वो एक वक्त का खाना ना खाकर व्रत करें। प्रधानमंत्री की इस अपील को जनता ने सिर आंखों पर रखा और संपन्न घर के लोगों ने भी एक वक्त का खाना छोड़ दिया, जिससे अगली फसल आने तक भारत में अनाज की पूर्ति हो सकी। कहा जाता है कि इस अपील से पहले शास्त्री जी ने अपने घर में पत्नी बच्चों समेत एक वक्त खाना ना खाकर देखा था कि क्या एक दिन का खाना बिना खाए रहा जा सकता है। उनका परिवार जब एक वक्त बिना खाना खाए रह पाया तब उन्होंने देश की जनता से ये अपील की।

पीएम के रूप में लोगों की पहली पसंद मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि एक सर्वे के मुताबिक आज भी देश के लगभग 53 फीसदी लोग चाहते हैं कि देश के प्रधानमंत्री मोदी ही बनें। ‘सीवोटर-इंडिया टुडे मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे में ये जानकारी मिली। इस सर्वे के मुताबिक 53 फीसदी लोग एक बार फिर से पीएम नरेंद्र मोदी को ही देश का पीएम बनते देखना चाहते हैं। 53 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी को अपनी पसंद बताया, तो 9 प्रतिशत लोग राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। तीसरे नंबर पर लोगों की पसंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। 7 फीसदी लोग केजरीवाल को पीएम बनते देखना चाहते हैं। यानी देश की आधी से ज्यादा आबादी मोदी को ही अगले पीएम के रूप में देखना चाहती है।