देवरिया: अगर आपको बागवानी का शौक है तो ये मौसम एकदम परफेक्ट है। बहुत सी महिलाओं को गार्डनिंग का काफी शौक होता है, वो दिनभर खुद को इसमें बिजी रखती हैं। आजकल शहरों में जगह की कमी रहती है फिर भी आप घर की छत पर, बालकनी पर पौधे लगा सकते हैं। घर के किसी भी एक कोने में हरियाली रहने से उसे देखकर आंखों को सुकून और मन को खुशी मिलती है। इसके साथ ही अगर आपके पास पर्याप्त जगह है तो आप किचन गार्डन भी तैयार कर सकते हैं। इसमें किचन में रोज उपयोग होने वाली कुछ सब्जियां जैसे- धनिया, मिर्च, टमाटर, मेथी लगाए जा सकते हैं। यहां हम आपको गार्डनिंग से जुड़े कुछ टिप्स दे रहे हैं जो आपके काम आएंगे। आजकल अर्बन फॉर्मिंग का लोगों को क्रेज भी है। शौक भी पूरा होगा और घर की ताजी सब्जियां भी मिलेंगी।


छोटी या बड़ी किसी भी जगह से करें शुरुआत
अगर आपके पास जगह की कमी नहीं है तो कोई आप किसी एक जगह को चुन सकते हैं जैसे घर के सामने का खुला हिस्सा या पीछे का खाली पड़ा हिस्सा, लेकिन उसमें बाउंड्री या कोई घेरा जरूर कराएं जिससे मवेशियों से पौधों को बचाया जा सके साथ ही आपका गार्डन सिस्टमैटिक लगे। अगर आप किसी फ्लैट में या छोटे मकान में रहते हैं तो भी आप अपनी बालकनी को या छत को अपनी बागवानी के लिए तैयार कर सकते हैं।

कैसे तैयार करें मिट्टी
पौधे लगाने के लिए जरूरी नहीं है हर जगह की मिट्टी अच्छी गुणवत्ता वाली हो लेकिन हम मिट्टी में कुछ चीजों को सही अनुपात में मिलाकर उसे पौधों के लिए बेहतर बना सकते हैं। मिट्टी में पानी कुछ समय तक रुके रहे इसके लिए उसमें 20 फीसदी बालू और 10 फीसदी कोकोपिट मिला दीजिए। मिट्टी की अच्छी उर्रवरता के लिए उसमें 10 फीसदी सरसों की खली का खाद मिलाएं। अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाकर किसी गमले या क्यारी में डालें और फिर पौधे लगाएं। वैसे दोमट मिट्टी बागवानी के लिए सबसे अच्छी मिट्टी मानी गई है।


तैयार करें छोटा किचन गार्डन
फूलों के पौधे और शो प्लांट्स के साथ ही कुछ किचन में काम आने वाले पौधे भी लगाएं जो हमें लगभग रोज ही काम आते हैं। इन्हें गमलों में भी लगाया जा सकता है। सही देखभाल से ये गमलों में भी अच्छी तरह से ग्रोथ करते हैं और फल देते हैं। अगर आपके पास जगह पर्याप्त है तब तो फिर आप अपनी मनचाही सब्जियां लगा सकते हैं। घर की सब्जियों से बेहतर कुछ और हो ही नहीं सकता। स्वाद और सेहत के साथ बचत भी होती है।

टैरेस गार्डन का बढ़ रहा चलन
आजकल शहरों में जगह की कमी होने की वजह से गार्डनिंग के शौकीन लोग घर की छत पर बागवानी करते हैं, जिसे टैरेस गार्डन कहा जाता है। इससे घर की छत का अच्छा उपयोग भी हो जाता है और गार्डन का मजा भी लिया जा सकता है। टैरेस गार्डन बनाते वक्त हमें कुछ बातों का ध्यान रखाना चाहिए, जिससे घर की छत को भी किसी प्रकार का नुकसान ना हो।
• सबसे पहले हमें छत पर वॉटर प्रूफिंग या रूट बैरियर लेयर करवा लेना चाहिए जिससे मिट्टी या पानी से छत खराब ना हो।
• छत पर पानी के निकलने और कुछ पानी को स्टोर करके रखने की व्यवस्था भी कर लेनी चाहिए।
• छत पर लगे पौधे गर्मियों के दिनों में सीधे तेज धूप के संपर्क में आते हैं इसलिए छत पर तेज धूप से बचाव के लिए गर्मियों में ग्रीन नेट जरूर लगवाएं।
• वैसे आप छत पर छोटे-बड़े गमले रखकर भी पौधे लगा सकते हैं। लेकिन अगर सीधे छत पर ही मिट्टी बिछानी हो तो किसी अच्छे जानकार से सलाह जरूर लें।



बालकनी पर मिनी गार्डन
शहरों में फ्लैट का चलन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ना तो हमारे पास गार्डन के लिए जगह होती ना छत हमारी होती कि हम छत पर बागवानी कर लें, ऐसे में आप अपनी बालकनी को भी गार्डन का लुक दे सकते हैं। इसके लिए बालकनी की दीवारों पर और रेलिंग पर हैंगिंग गमले लगा सकते हैं और जमीन पर आर्टिफीशियल ग्रास बिछा सकते हैं। जमीन पर किनारे छोटे-छोटे गमलों में पौधे लगाए और जगह पर्याप्त हो तो दो छोटी कुर्सियां और एक टेबल रखें, जहां आप जब चाहें पौधों के बीच अपनों की कंपनी एन्जॉय करें।


वर्टिकल गार्डन
अगर आप बागवानी के शौकीन हैं और आपके पास जगह नहीं है तो वर्टिकल गार्डन आपके लिए बहुत अच्छा विकल्प है। वर्टिकल गार्डन गार्डनिंग की नई शैली है ये ऐसे बगीचे हैं जो दीवारों पर लगाए जाते हैं। इन्हें बरामदे, छत या बालकनी की दीवारों पर बनाया जा सकता है। ये ना सिर्फ दिखने में सुंदर लगते हैं बल्की इनसे घर में ताजी और शुद्ध हवा भी मिलती है। इनडोर वर्टिकल गार्डन के लिए फिकस रेपेन्स, पाइलिया और कैलेथिया सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। इनका उपयोग ग्रीन वॉल्स के लिए किया जाता है।



गार्डन की देखभाल
ज्यादातर लोग शौक में गार्डन तो तैयार कर लेते हैं लेकिन उनकी देखभाल ठीक से नहीं करते जिसके चलते या तो पौधे सूख जाते हैं या गमलों में और क्यारियों में कचरा जमा हो जाता है। बागवानी के साथ-साथ समय पर उनकी देखभाल करनी भी जरूरी है। पौधों को हर रोज पानी दें। ध्यान रखें कि पौधों के आकार और टाइप के अनुसार ही जितनी जरूरत हो उतना ही पानी दें। ये जरूरी नहीं है कि हर पौधों को समान मात्रा में पानी की जरूरत होती है। मिट्टी की कोड़ाई भी जरूरी है। पौधे लगाने के कुछ समय बाद मिट्टी जम सी जाती है और उपरी परत कड़ी हो जाती है। समय- समय पर कोड़ाई करने से मिट्टी ऊपर-नीचे होती है और पानी भी अच्छी तरह से जड़ों तक पहुंच पाता है। गार्डन से खरपतवार साफ करना भी जरूरी है नहीं तो वो पौधों के हिस्से का पोषक तत्व खींच लेते हैं। छोटे गमलों से भी सूखे पत्तों को समय-समय पर साफ कर लें। जरूरत के हिसाब से खाद और बीमारियों से बचाने के दवा का छिड़काव भी करें।

इस तरह आप गार्डनिंग के अपने शौक के साथ-साथ थोड़ी बचत कर सकती हैं और घर को सेहतमंद भी रख सकती हैं। केमिकलयुक्त सब्जी खरीद कर लाने और खाने से अच्छा है कि अपने शौक से ही घर पर सब्जियां उगा ली जाएं। सुंदर घर और ताजी हवा आपको तन-मन से ठीक रहेगी।