‘मेरे निर्वाचन में लोकतंत्र की शक्ति, देश के गरीबों का आशीर्वाद, महिलाओं के सपने और सामर्थ्य की झलक’

देवरिया: द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति बन गई हैं। संसद के सेंट्रल हॉल में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सेंट्रल हॉल में आज एक ऐतिहासिक कहानी लिखी गई है। आज देश इस बात का गवाह बना है कि हिन्दुस्तान में हर वर्ग को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अधिकार है। गरीब, आदिवासी परिवार की बेटी का वार्ड पार्षद से देश के प्रथम नागरिक बनने तक का सफर ये किसी मिसाल से कम नहीं हैं। द्रौपदी मुर्मू देश के पहली महिला आदिवासी हैं। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने ‘जोहार’ बोलकर जब सभी का अभिवादन किया, तो सेंट्रल हॉल तालियों की गड़गड़हाट से गूंज उठा। शपथ ग्रहण समारोह मे पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा सभी दिग्गज नेता और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

गौरवशाली इतिहास के साथ नई उम्मीदों का जिक्र
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथ ग्रहण के बाद संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने अपनी जीवन यात्रा के बारे में बात की। भारत के गौरवशाली इतिहास को याद किया, तो आने वाली नई उम्मीदों का जिक्र भी। उन्होंने कहा “जनजातीय समाज से होने के चलते यहां तक पहुंचना मेरे लिए आसान नहीं था, यह लोकतंत्र की महानता है कि एक आदिवासी समाज की बेटी ने वार्ड पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक का सफर तय किया।” उन्होंने कहा कि “मेरा इस पद पर पहुंचना करोड़ों महिलाओं के सपनों की झलक है।” राष्ट्रपति ने सर्वोच्च संवैधानिक पद पर निर्वाचित करने के लिए सभी सांसदों और विधायकों का आभार व्यक्त किया।

ये देश के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वो ऐसे कालखंड में देश की राष्ट्रपति चुनी गई हैं, जब भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। जब देश स्वाधीनता के 50वें वर्ष का जश्न मना रहा था, तब उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी। वे आजाद भारत में जन्म लेने वाली देश की पहली राष्ट्रपति हैं। उनकी यात्रा ओडिशा के छोटे से गांव से शुरू हुई थी। वो अपने गांव की पहली ऐसी लड़की हैं, जो कॉलेज गई। राष्ट्रपति ने कहा कि सर्वोच्च पद पर पहुंचना उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ये लोकतंत्र की शक्ति है कि गरीब, सुदूर आदिवासी क्षेत्र की बेटी भारत की राष्ट्रपति बन सकती है।

भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और पूरा भी कर सकता है: राष्ट्रपति
द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उनका निर्वाचन इस बात का सबूत है कि भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। मेरे निर्वाचन में गरीब का आशीर्वाद शामिल है। देश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के सपनों और सामर्थ्य की झलक है। उन्होंने देश का आधी आबादी से सशक्त होने और हर क्षेत्र में योगदान देने की अपील के साथ-साथ युवाओं से भविष्य के भारत की नींव रखने को कहा। साथ ही सहयोग का वादा भी किया।

संघर्ष से सफलता के शिखर तक का सफर
नई राष्ट्रपति की जीवन यात्रा संघर्षपूर्ण रही। वो जिस गांव से आती हैं, वहां राजनीति को भी अच्छा नहीं माना जाता था फिर भी उन्होंने सारी रूढ़िवादी मान्यताओं को तोड़ते हुए पढ़ाई भी की और राजनीति में भी आईं। उन्होंने निजी जीवन में भी लगातार संघर्ष किया। अपने दो बेटों को कम उम्र में खो दिया। उसके कुछ दिन के बाद ही उनके पति का भी देहांत हो गया। एक महिला के लिए अपने दो-दो बेटों को कम उम्र में खोना और उसके बाद अपने पति की मृत्यु किसी त्रासदी से कम नहीं होती, इसके बाद भी उन्होने आध्यात्म का सहारा लेकर खुद को फिर से खड़ा किया और आज लोकतंत्र के सबसे उच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुईं।