देवरिया। ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि समेत देश के दूसरे धार्मिक स्थलों से जुड़े केस के मुख्य पैरोकार जितेंद्र सिंह बिसेन इन सभी मुकदमों से खुद को अलग कर रहे हैं। जितेंद्र सिंह बिसेन जो विश्व वैदिक सनातन संघ संस्थापक भी हैं ने शनिवार को लिखित बयान जारी कर इस बात का एलान किया। उन्होंने हिंदू पक्ष पर ही उनको और उनके परिवार को अलग-थलग किए जाने का आरोप लगाया है।

किस कारण से केस छोड़ रहे बिसेन
बयान जारी कर उन्होंने कहा- “हिंदू पक्ष के लोगों ने ही अलग-थलग करने का प्रयास किया। इसलिए सभी मुकदमों से वे खुद को और अपने परिवार को अलग कर रहे हैं। यह फैसला कठिन था, लेकिन लेना पड़ा। देश और धर्म हित में अलग अलग न्यायालयों में मुकदमे दायर किए गए हैं। उनकी प्रभावी पैरवी की जा रही है। हमारी पैरोकारी में ही वाराणसी के ज्ञानवापी से जुड़े मां श्रृंगार गौरी प्रकरण को राखी सिंह और आदि विश्वेश्वर प्रकरण को किरन सिंह विसेन लड़ रही हैं। सभी मुकदमों को दाखिल करने के बाद मैं और मेरा परिवार हिंदू पक्ष के लोगों के निशाने पर आ गया। धर्म युद्ध की इस लड़ाई के दौरान अपने ही समाज ने हमें गद्दार घोषित कर दिया। शासन-प्रशासन भी प्रताड़ित कर रहा है।”

बीच में छोड़ रहा धर्म युद्ध, शुरू करना सबसे बड़ी गलती
अपने बयान में आगे उन्होंने कहा-“ शक्ति और सामर्थ्य सीमित होने की वजह से ही इस धर्म युद्ध को बीच में ही छोड़ रहा हूं। इसे शुरू करके शायद मैंने अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती की थी। यह समाज धर्म के नाम पर भ्रमित करने वाले लोगों के साथ खड़ा रहता है। अपना सर्वस्व न्यौछावर करके देश और समाज की रक्षा का काम करने वाला उपेक्षित और अपमानित किया जाता है। इसलिए क्षमा चाहता हूं। अब और नहीं सहा जाता है।”

ज्ञानवापी समेत सभी मुकदमों से हट गए हैं बिसेन
विसेन ने न सिर्फ ज्ञानवापी मामले से हटने का एलान किया है बल्की कृष्ण जन्मभूमि, कुतुबमिनार, भोजशाला और मथुरा समेत अपने दायर में किए गए सभी मुकदमों से हट रहे हैं। 2021 में ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी में पूजा की अनुमति मांगने वाली याचिका जिन महिलाओं द्वारा लगाई गई थी, उनमें मुख्य याचिकाकर्ता राखी सिंह जितेंद्र सिंह बिसेन की भतीजी हैं। वादी महिलाओं में पिछले साल ही बिखराव आ गया था।