देवरिया। महाकुंभ, (Mahakumbh 2025)मेला क्षेत्र का नजारा पुरी तरह से आध्यात्मिक और धार्मिक रंग में रंग चुका है। संगम नगरी प्रयागराज जिसे बड़े तीर्थों में एक माना जाता है पूरी तरह से आध्यत्मिक नगरी बन चुकी है। यहां पर सिर्फ देश ही नहीं विदेशों से भी साधु संत पहुंच चुके हैं। कुंभ में कुछ ऐसे अनोखे साधु संत भी देखने को मिलेंगे जिनसे मिलने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। ये बाबा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें से कोई अपनी जटा की वजह से मशहूर हो रहा है तो कोई अपनी IIT की डिग्री की वजह से। आइए जानते हैं कुंभ(Mahakumbh 2025) में पहुंचने वाले इन अद्भुत संतों के बारे में।

IIT बाले बाबा
कुंभ (Mahakumbh 2025)में अभी जो सबसे ज्यादा मशहूर हो रहे हैं वो हैं IIT वाले बाबा। IIT वाले बाबा के नाम से जाने जाने वाले अभय कुमार को साइंस से लेकर आध्यात्मक का गहरा ज्ञान है। वो धर्म, आध्यात्म और साइंस को जोड़कर ऐसा-ऐसा तर्क देते हैं कि अच्छे-अच्छे लोग उनका तर्क मानने को तैयार हो जाते हैं। अभय सिंह अभी जूना अखाड़ा के शिविर में रह रहे हैं। हालांकी अभी तक उन्होंने दीक्षा नहीं ली है। अभय सिंह ने अपने कई इंटरव्यू में बताया है कि IIT से इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने अपने पैशन फोटोग्राफी को भी अपनाया था। उसके बाद कई कंपनियों में लाखों के पैकेज में नौकरी भी की लेकिन एक संन्यासी बनने के बाद ही उन्हें जीवन के सत्य और शांति का सच्चा
अनुभव मिला।

कबूतर बाले बाबा
मेला क्षेत्र (Mahakumbh 2025)में आपको एक और अद्भुत बाबा देखने को मिल जाएंगे। ये बाबा हैं महंत राजापुरी जी महाराज। इनकी खासियत है इनके सर पर बैठा कबूतर। बाबा के सर पर जटाओं का बड़ा जूड़ा है और उस पर हर वक्त एक कबूतर बैठा होता है। महंत राजापुरी जब शाही स्नान के लिए गए थे तब भी कबूतर उनके सर पर था। कबूतर की वजह से ही बाबा राजापुरी कबूतर बाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध हो गए हैं।

रुद्राक्ष वाले बाबा
रुद्राक्ष बाले बाबा अपने सर पर हजारों रुद्राक्ष को धारण करने की वजह से मशहूर हैं। रुद्राक्ष वाले बाबा का नाम महंत गीतानंद गिरी है। इन्होंने पिछले 6 सालों से अपने सर पर और गले में रुद्राक्ष धारण कर रखा है। उनका संकल्प है कि वह 12 सालों के लिए रुद्राक्ष धारण करके रखेंगे। उनके द्वारा पहने गए रुद्राक्ष का कुल वजन 45 किलो है।

कांटे वाले बाबा
कुंभ (Mahakumbh 2025)में पहुंचे बाबा अपनी अद्भुत तपस्या और संकल्पों के लिए मशहूर होते हैं। उनमे से एक बाबा हैं कांटे वाले बाबा। ये बाबा लगभग 40 से 50 सालों से कांटों की सैया पर लेटकर तपस्या कर रहे हैं। कांटे वाले बाबा कांटे पर ही सोते हैं और कांटे पर ही बैठकर तपस्या करते हैं। कांटे वाला बाबा का नाम रमेश कुमार मांझी है। अपनी इस कठिन तपस्या के कारण कुंभ में हर कोई उनके दर्शन करने का इच्छुक नजर आ रहा है।
पायलट बाबा
जूना अखाड़े के सोमेश्वर पुरी महाराज पायलट बाबा के नाम से जाने जाते हैं। इन्हें पायलट बाबा इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये कभी इंडियन एयरफोर्स में अफसर हुआ करते थे। एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद उन्होंने बैंक की भी नौकरी की। फिर अचानक सांसारिक दुनिया को छोड़कर आध्यात्म का रास्ता अपना लिया और आज संन्यासी का जीवन बीता रहे हैं।

रबड़ी वाले बाबा
रबड़ी वाले बाबा श्रद्धालुओं को रबड़ी बांटने के लिए मशहूर हैं। सुबह अपने नित्य कर्मों और पूजा पाठ के बाद उनकी रबड़ी की कढ़ाही उनके टेंट में ही चढ़ जाती है। वहां वो खुद रबड़ी तैयार करते हैं और वहां आने वाले भक्तों को अपने हाथों से प्रसाद के रूप में बांटते हैं। रबड़ी बाले बाबा गुजरात से आए हैं और उनका नाम देवगिरी महाराज है।
स्कॉर्पियो बाबा
स्कॉर्पियो बाबा एक नागा साधु हैं। लेकिन इन्हें स्कॉर्पियो बाबा इसलिए कहा जात है क्योंकि ये पूरे समय एक स्कॉर्पियों पर बैठे रहते हैं और वहीं से अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।