देवरिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज एक नया इतिहास रच गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया है। 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से अब तक योगी आदित्यनाथ ने 8 वर्ष और 132 दिनों का कार्यकाल पूरा कर लिया है, जिससे उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत का 72 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
गोविंद बल्लभ पंत का रिकॉर्ड टूटा
स्वतंत्रता से पहले और बाद दोनों कालखंडों को मिलाकर गोविंद बल्लभ पंत का मुख्यमंत्री पद पर कुल कार्यकाल 8 वर्ष 127 दिन का था। अब योगी आदित्यनाथ ने इसे पार कर लिया है और उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने वाले नेता बन गए हैं। योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 22वें मुख्यमंत्री हैं। वे राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने एक पूर्ण कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद दोबारा लगातार सत्ता में वापसी की। वर्ष 2022 में उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2017 और 2022—दोनों विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला, जिसमें योगी आदित्यनाथ पार्टी के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली चेहरे रहे।
कानून व्यवस्था समेत कई क्षेत्रों में लाया सुधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यकाल सिर्फ समय की गणना नहीं है, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश में एक युग परिवर्तन की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है। उनके नेतृत्व में राज्य ने बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था, निवेश, और सामाजिक योजनाओं में कई राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां हासिल की हैं। वे लगातार आठवीं बार विधान भवन की प्राचीर पर ध्वजारोहण करने वाले पहले मुख्यमंत्री भी बने हैं।
पूर्व मुख्यमंत्रियों से आगे निकले योगी
योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल में स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव, मायावती, एनडी तिवारी, अखिलेश यादव जैसे कई दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ दिया है। अन्य प्रमुख मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल इस प्रकार रहा:
- गोविंद बल्लभ पंत: 8 वर्ष 127 दिन
- मायावती: 7 वर्ष 127 दिन
- मुलायम सिंह यादव: 6 वर्ष 274 दिन
- संपूर्णानंद: 5 वर्ष 345 दिन
- अखिलेश यादव: 5 वर्ष 4 दिन
- नारायण दत्त तिवारी: 3 वर्ष 314 दिन
सबसे युवा सांसदों में से एक रहे हैं योगी
योगी आदित्यनाथ ने 1998 में मात्र 26 वर्ष की उम्र में गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में कदम रखा था। वे लगातार पांच बार सांसद रहे और देश के सबसे युवा सांसदों में गिने गए। राजनीति के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ की पहचान एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में भी है। वे गोरखनाथ मठ के महंत हैं। 2014 में अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ के निधन के बाद उन्होंने यह पदभार संभाला। तब से वे गोरक्षपीठ के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं।