देवरिया।भारत के ग्रैंडमास्टर आर प्रागनानंद ने चेस वर्ल्डकप 2023 के फाइनल में जगह बनाकर एक बड़ा रिकॉर्ड कायम कर लिया है। प्रगनानंद ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे पहले केवल विश्वनाथ आनंद ही वर्ल्डकप के सेमीफाइनल तक पहुंचने में सफल हुए थे। प्रागनानंद ने भारत के ही अर्जुन एरिगैसी को सडन टाईब्रेकर में 5-4 से मात दी। फाइनल में उन्हें अमेरिकी खिलाड़ी से भिड़ना होगा। सोशल मीडिया में प्रागनानंद के साथ उनकी उस तस्वीर की भी खूब चर्चा हो रही है, जिसमें उनकी मां नजर आ रही है। जानते हैं वो कौन सी तस्वीर है और उसमें क्या खास है।

मां के साथ तस्वीर हो रही वायरल
प्रागनानंद के नए रिकॉर्ड के साथ उनकी उस तस्वीर की भी खूब चर्चा हो रही है जिसमें उनकी मां उनके साथ नजर आ रही हैं। एक तस्वीर में प्रागनानंद इंटरव्यू देते हुए नजर आ रहे हैं और उनकी मां उनके पास ही खड़ी मुस्कुराते हुए नजर आ रही हैं। वहीं दूसरी तस्वीर प्रागनानंद के फाइलन में पहुंचने के समय की है जब उनके इस मुकाम पर पहुंचने पर उनकी मां भावुक हो गईं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू गिरने लगे। तस्वीर में प्रागनानंद की मां अपने पल्लू से आंसू पोछते हुए नजर आ रही हैं। दोनों ही तस्वीरों में मां की ममता की झलक दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया यूजर्स इन दोनों तस्वीरों की खूब तारीफ कर रहे हैं।

मां की सादगी से प्रभावित हुए यूजर्स
प्रगनानंद बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वायरल तस्वीर में उनकी और उनकी मां नागलक्ष्मी की सादगी साफ नजर आ रही है। यूजर्स उनके साथ-साथ उनकी मां के लिए भी कमेंट कर रहे हैं। उस एक तस्वीर से मां की सारी भावनाएं व्यक्त हो रही हैं। एक यूजर ने लिखा है- ‘सभी मांओं को सलाम, जिनमें से कई अपने बच्चों के लिए अपना जीवन बलिदान कर देती हैं’। एक यूजर ने लिखा है- ‘इस तस्वीर को देखकर मैं भी उतना ही गर्व महसूस कर रहा हूं जितना प्रागनानंद की मां’, वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है- ‘प्राउड मदर, इस तस्वीर के फोटोग्राफर को नमन’। नागलक्ष्मी तस्वीर में सिंपल कॉटन की साड़ी में नजर आ रही हैं और माथे पर लाल बिंदी के साथ दक्षिण भारत में लगाए जाने वाला सफेद चंदन भी लगाया है। प्रागनानंद की उपलब्धि की खुशी उनकी आंखों में साफ नजर आ रही है।
महज 18 साल के हैं प्रागनानंद
आपको बता दें प्रागनानंद सिर्फ 18 साल के हैं। उनके नाम सबसे कम उम्र का शतरंज इंटरनेशल चैंपियन होने का भी रिकॉर्ड दर्ज है। प्रागनानंद जब 10 साल 10 महीने के थे तभी उन्होंने यह खिताब अपने नाम कर लिया था। अपना पहला ग्रैंडमास्टर उन्होंने वर्ल्ड जूनियर चेस चैंपियनशिप में हासिल की थी।