देवरिया। अष्टविनायक के आठ पवित्र गणपति मंदिरों में सातवां स्थान विघ्नेश्वर गणपति मंदिर को प्राप्त है। यह मंदिर महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर तालुका के ओझर नामक स्थान पर स्थित है। यहां भगवान गणेश को विघ्नहर्ता स्वरूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस मंदिर में दर्शन करने से जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। इसी कारण यह स्थान “विघ्नेश्वर श्री क्षेत्र ओझर” के नाम से प्रसिद्ध है।

गणपति का स्वरूप और विशेष सजावट

मंदिर में विराजमान विघ्नेश्वर गणपति की मूर्ति पूर्वमुखी है। गणेश जी की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। यहां भगवान की प्रतिमा को विशेष रूप से हीरे और जवाहरात से सजाया जाता है। गणपति की आंखों में रूबी रत्न जड़े हुए हैं, नाभि पर कीमती रत्न अलंकृत है और माथे पर तिलक स्थान पर चमकदार हीरा जड़ा हुआ है। इस अद्भुत श्रृंगार के कारण विघ्नेश्वर गणपति का स्वरूप और भी मनमोहक और आकर्षक प्रतीत होता है।

मंदिर की वास्तु विशेषताएं

यह भव्य मंदिर कुकड़ी नदी के किनारे स्थित है। इसका निर्माण सन् 1785 में श्रीमंत चीमाजी अप्पा द्वारा करवाया गया था। मंदिर पूर्वमुखी है और चारों ओर मजबूत पत्थरों की मोटी दीवारें बनी हुई हैं। मंदिर के शिखर पर सोने का कलश स्थापित है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाता है। यहां आने वाले भक्त इस प्राचीन और दिव्य वास्तुकला को देखकर अभिभूत हो जाते हैं। विशेषकर गणेश उत्सव के समय मंदिर परिसर में बड़े उत्सव जैसा माहौल होता है।

क्यों पड़ा विघ्नेश्वर नाम

विघ्नेश्वर गणपति के नामकरण से जुड़ी एक प्राचीन कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार राजा अभिनंदन ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन उन्होंने इंद्रदेव को आमंत्रित नहीं किया। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने विघ्नासुर नामक राक्षस को वहां यज्ञ भंग करने भेजा। विघ्नासुर ने साधुओं को परेशान किया और धार्मिक कार्यों में बाधा डालने लगा।

साधुओं ने भगवान गणेश से प्रार्थना की। गणपति ने तुरंत अवतार लेकर विघ्नासुर का वध कर दिया। जिस स्थान पर उन्होंने विघ्नासुर का अंत किया, वहीं गणेश जी को स्थापित किया गया। साधुओं के विघ्न दूर करने के कारण गणपति को ‘विघ्नेश्वर’ नाम प्राप्त हुआ। आज भी हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं और अपने जीवन के कष्टों व विघ्न-बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। विघ्नेश्वर गणपति का यह पावन धाम श्रद्धा, आस्था और शांति का अद्भुत संगम है।

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