देवरिया। अष्टविनायक दर्शन में चौथे स्थान पर आने वाला वरदविनायक गणपति मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बेहद पावन माना जाता है। यह मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के महड़ नामक छोटे से गांव में स्थित है। “वरदविनायक” (Varadvinayak) नाम का अर्थ है वरदान देने वाले विनायक मान्यता है कि यहां सिर्फ बप्पा का नाम लेने भर से ही भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
स्वयंभू गणपति की प्रतिमा
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां स्थापित गणपति प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। मूर्ति पत्थर की बनी है, पूर्वमुखी है और इसकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई है। भगवान गणेश यहां रिद्धि और सिद्धि के साथ विराजित हैं। मान्यता है कि वर्ष 1690 में एक व्यक्ति को यह मूर्ति तालाब में मिली थी। बाद में मंदिर का निर्माण करवाकर प्रतिमा को यहां स्थापित किया गया। आज भी मंदिर में प्रतिमा के दर्शन के लिए गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है, लेकिन भक्त बाहर से ही बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मंदिर का निर्माण और स्वरूप
वरदविनायक (Varadvinayak) मंदिर का निर्माण 1725 में सूबेदार रामजी महादेव बिवलकर ने करवाया था। मंदिर पूर्वमुखी है और इसे एक तालाब के किनारे बनाया गया है। चारों ओर हाथियों की आकृतियाँ मंदिर की शोभा बढ़ाती हैं। इसकी सबसे खास पहचान है स्वर्ण शिखर लगभग 25 फीट ऊंचे गुंबद पर सोने का कलश स्थापित है, जो श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करता है।
अखंड ज्योति और धार्मिक मान्यताएं
मंदिर में “नंददीप” नाम की एक अखंड ज्योति प्रज्वलित है, जो 1892 से लगातार जल रही है। यह ज्योति आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि गणेश जन्मोत्सव के दौरान जो महिलाएं यहां से नारियल का प्रसाद प्राप्त करती हैं, उन्हें संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है और विशेष रूप से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। मंदिर के पश्चिमी भाग में स्थित तालाब भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस तालाब में स्नान कर दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यहां होने वाले पर्व और उत्सव
वरदविनायक (Varadvinayak) मंदिर में माघी चतुर्थी का पर्व विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा गणेश चतुर्थी पर दस दिनों तक यहां भव्य उत्सव का आयोजन होता है। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्तिमय हो उठता है। वरदविनायक गणपति मंदिर सिर्फ अष्टविनायक यात्रा का एक पड़ाव ही नहीं, बल्कि आस्था, चमत्कार और मान्यताओं का संगम है, जहां हर श्रद्धालु अपनी इच्छाओं के पूरे होने का विश्वास लेकर आता है।
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