देवरिया। उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और उनकी पत्नी स्वाति सिंह अलग हो गए हैं। दोनों का रिश्ता अब कानूनी रूप से भी टूट गया है। कोर्ट में चल रहे तलाक के केस पर अदालत ने मुहर लगा दी है। लखनऊ फैमिली कोर्ट के अपर न्यायाधीश देवेंद्र नाथ सिंह ने 28 मार्च को दोनों के विवाह को खत्म करार देते हुए फैसला सुनाया। हालांकि स्वाति और दयाशंकर पिछले कई सालों से अलग रह रहे थे। अब कोर्ट के फैसले के बाद दोनों कानूनी रूप से पति-पत्नी नहीं रहे।
एक बार खारिज हो चुकी थी तलाक की अर्जी
स्वाति सिंह ने पारिवारिक विवादों का हवाला देते हुए साल 2012 में ही तलाक के लिए लखनऊ पारिवारिक न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया था। जिसे अदालत ने विचारार्थ रखते हुए दयाशंकर को अपना पक्ष रखने और आपत्ति दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया था। लेकिन 2017 में स्वाति सिंह ने भाजपा के टिकट से विधानसभा चुनाव जीता और उन्हे मंत्री पद दिया गया जिसके बाद वह लगातार कई सुनवाई में अदालत में हाजिर नहीं हुईं। लगातार गैर हाजिरी के चलते 2018 में उनके द्वारा दायर मुकदमे को पैरवी के अभाव में खारिज कर दिया गया था।
मार्च 2022 में दोबारा दाखिल की अर्जी
स्वाति सिंह ने मार्च 2022 में दोबारा अर्जी देकर केस को फिर शुरू करने की अपील की। बाद में उस अर्जी को वापस लेकर नई अर्जी दायर की गई। इसके बाद स्वाति सिंह ने न्यायालय में साक्ष्य देते हुए कहा कि चार सालों से उनके और दयाशंकर के बीच कोई वैवाहिक संबंध नहीं है और दोनों अलग रह रहे हैं। कोर्ट ने सुनवाई के बाद साक्ष्यों से सहमत होकर तालक को मंजूरी दे दी।
इस तरह हुआ राजनीति में प्रवेश
स्वाति सिंह का राजनीति में प्रवेश अचानक से हुआ था। दरअसल दयाशंकर सिंह ने पूर्व सीएम मायावती को लेकर एक टिप्पणी कर दी थी जिसके बाद विवाद काफी बढ़ गया था। इस विवाद में जब परिवार को भी घसीटा गया तब स्वाति सिंह ने अकेले ही मोर्चा संभाला, जिसके बाद वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में लाइम लाइट में आ गईं और उन्हें सीधे भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा का अध्यक्ष बना दिया गया। इसके बाद उन्हें भाजपा से टिकट मिल गई। वे विधायक बनीं और फिर सीधे प्रदेश सरकार में मंत्री। हालांकि पिछले चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिली जबकि दयाशंकर ने बलिया सीट से जीत हासिल की।
विद्यार्थी परिषद के समय संपर्क में आए थे दोनों
स्वाति और दयाशंकर दोनों ही बलिया के रहने वाले थे। दोनों की मुलाकात विद्यार्थी परिषद के जरिए हुई थी। जिस समय स्वाति इलाहाबाद से एमबीए की पढ़ाई कर रही थी उसी समय दयाशंकर सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में काफी सक्रिय थे। दोनों ही विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए थे इसलिए दोनों की मुलाकात होती रहती थी। कुछ ही दिनों में दोस्ती की इस रिश्ते को दोनों से शादी कर नाम दे दिया था। लेकिन लगभग 10 सालों से दोनों के बीच तल्खियां बढ़ने लगी थी और इसकी खबर आम से लेकर खास सभी लोगों को थी।