देवरिया। भारत के जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने पांचवें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इसमें ओडिशा पहले स्थान पर रहा वहीं उत्तर प्रदेश को दूसरा स्थान मिला है। गुजरात और पुडुचेरी को संयुक्त रूप से तीसरा स्थान मिला। राष्ट्रीय जल पुरस्कार भारत में जल संरक्षण और प्रबंधन में योगदान और उल्लेखनीय कार्य के लिए दिया जाता है।
22 अक्टूबर को राष्ट्रपति देंगी पुरस्कार
राष्ट्रीय जल पुरस्कार 9 अलग-अलग श्रेणियों में दिया जाता है। सभी श्रेणियों के लिए नामों की सूची जारी कर दी गई है। पुरस्कार 22 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों दिया जाएगा। कभी पानी की किल्लत से जूझते ओडिशा ने जलसंरक्षण में कई उल्लेखनीय काम किए हैं, जिनमें बारिश के पानी का संरक्षण, पारंपरिक जलाशयों का निर्माण और जीर्णोद्धार शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश को क्यों चुना गया?
जल संरक्षण में दूसरे नंबर पर रहे उत्तर प्रदेश को जल जीवन मिशन के तहत किए गए उल्लेखनीय काम के लिए पुरस्कार दिया जा रहा है। इस मिशन के तहत 17 हजार 900 से ज्यादा गांवों में नलजल कनेक्शन दिये गये हैं। जिससे 1 करोड़ 91 हजार परिवारों को फायदा हुआ। उत्तर प्रदेश ने वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट में भी सराहनीय कदम उठाए हैं। गंगा में प्रदूषण कम करने के लिए 4,100 एमएलडी की संयुक्त क्षमता वाले 133 मलजल शोधन संयंत्र का निर्माण किया गया है। इससे प्रदूषित हुए पानी को फिर से उपयोग के लायक बनाया जा सका है।
इसके अलावा जल संरक्षण की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ जिला के लिए उत्तरी जोन से यूपी के बांदा को भी पुरस्कार मिला है।