देवरिया। साल 2024 में आने वाली राम नवमी अपने आप में विशेष होने वाली है। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और राम लला के प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार राम नवमी मनाई जाएगी। इस अवसर पर राम मंदिर ट्रस्ट और भक्तों ने खास तैयारियां की हैं। राम लला के जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर प्रभु श्री राम के मस्तक पर सूर्य तिलक किया जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं सूर्य तिलक क्या है और इसे किस प्रकार से किया जाएगा।
सूर्य की किरणें पहुंचेंगी राम लला के मस्तक पर
सूर्य तिलक से मतलब है कि खुद सूर्य की किरणें से भगवान के मस्तक पर पड़ेंगी और अपनी किरणों से तिलक करेंगी। इस पूरे उत्सव को ‘प्रोजेक्ट सूर्य तिलक’ नाम दिया गया है। इसमें प्रकृती और विज्ञान दोनों के मिलेजुले प्रयास से भगवान का सूर्य तिलक किया जाएगा। राम मंदिर की छत से सूर्य की किरणों के लिए एक पथ बनाया जाएगा जिसके माध्यम से सूर्य की किरणें गर्भ गृह तक पहुंचेंगी ।
कैसे पूरा होगा प्रोजेक्ट सूर्य तिलक
सूर्य तिलक को सफलता पूर्वक संपन्न कराने के लिए रुड़की के सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की मदद ली जा रही है। वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक विधि बनाई है जिसमें एक दर्पण, लेंस, पीतल और एक पाइप के माध्यम से सूर्य किरणों को अपने अनुसार मोड़ा जा सकेगा। इसके लिए किसी प्रकार के बिजली या बैटरी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एक बार यह विधि सफल हो जाएगी फिर हर साल राम नवमी पर प्रभु का सूर्य तिलक किया जाएगा।
लगभग 5 मिनट तक होगी पूरी प्रक्रिया
रामनवमी के दिन राम लला के जन्म के समय यानी दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक की प्रक्रिया को किया जाएगा। लगभग 5 मिनट तक सूर्य किरणें प्रभु श्री राम के मस्तक पर अभिषेक करेंगी। राम लला के जन्म के साथ ही अभिषेक भी शुरु हो जाएगा। राम लला के विराजित होने के बाद पहली बार राम जन्मोत्स का आयोजन होने जा रहा है। इस अवसर पर होने जा रहा सूर्य तिलक भक्तों के लिए उत्साह और रोमांच दोनों का ही विषय है। सूर्य तिलक देखने के लिए भक्त बेसब्री से राम नवमी का इंतजार कर रहे हैं। ट्रस्ट ने सूर्य तिलक के लिए दो बार रिहर्सल भी कर लिया गया है। जो सफलता पूर्वक संपन्न हुआ है।