देवरिया। जिला कोर्ट, इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर सुप्रीमकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद 4 अगस्त से ज्ञानवापी का सर्वे ASI की टीम कर रही है। एएसआई की टीम का मानना है कि बारिकी से सर्वे करने में उन्हें करीब एक महीन का समय लग सकता है। जिस दिन से सर्वे शुरु हुआ है मीडिया और सोशल मीडिया में सर्वे सी जुड़ी कई खबरें चल रही हैं जिनमें से कुछ सहीं तो कुछ केवल अफवाहें हैं। एएसआई की टीम ने भी सरकार से अफवाहों पर रोक लगाने और सर्वे से जुड़ी किसी भी प्रकार की गलत जानकारी को रोकने की अपील की है । यहां पर हम आपको सिलसिलेवार बताते हैं सर्वे शुरू होने से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ है।
पहले दिन सिर्फ 5 घंटे हुआ सर्वे का काम
सर्वे के पहले दिन यानी कि 4 अगस्त को एएसआई की टीम सुबह 7 बजे ही सर्वे के लिए ज्ञानवापी पहुंच गई थी। टीम ने पहुंचते ही सर्वे का काम शुरू भी कर दिया था। लेकिन उस दिन शुक्रवार यानी जुम्मा होने के कारण टीम ने 12 बजे ही अपना काम समेट लिया। पहले दिन सर्वे से संबंधित कागजी कार्रवाई पूरी की गई, टीम ने पूरे परिसर का मैप तैयार किया, जिसके हिसाब से सर्वेक्षण का काम चरण दर चरण पूरा किया जाएगा। पहले दिन मैपिंग के साथ-साथ परिसर के दीवारों की जांच की गई है और जो साक्ष्य मिले उनकी निशानदेही की गई।
दूसरे दिन पूरे परिसर और गुंबद की हुई जांच
सर्वे के दूसरे दिन एएसआई की टीम ने पूरे ज्ञानवापी परिसर की जांच की। जांच में टीम को करीब 9 घंटे लग गए। दूसरे दिन ही मस्जिद के तीन गुंबदों के नीचे के हिस्से की भी जांच की गई। क्योंकि कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी प्रकार की खुदाई या तोड़फोड़ नहीं होगी इसलिए वजूखाने का हिस्सा जो सील किया गया है, उसकी जांच नहीं की गई। जांच के दौरान कुछ ऐसे प्रतीक चिन्ह मिले, जिनका हिंदू धर्मों से संबंध होने का दावा किया जा रहा है। उसकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की गई। दूसरे दिन मुस्लिम पक्ष के 5 प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
तीसरे दिन वैज्ञानिक तरीके से शुरू हुआ सर्वे
ASIकी टीम ने तीसरे दिन 7 घंटे सर्वे का काम किया। टीम ने तीसरे दिन वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल कर सर्वे का काम किया। ग्राउंड पेनिटरेटिंग रडार यानी जीपीआर टेक्निक के जरिए कई जगहों की जांच की गई। इसके साथ ही अगले दिन की जांच के लिए मस्जिद परिसर के पश्चिमी इलाके पर उगी घास को भी काटा गया और तहखाने की भी साफ-सफाई का काम शुरू किया गया। एएसआई की टीम जांच में मिल रहे सभी साक्ष्यों का रिकॉर्ड बनाती जा रही है। जरूरत के मुताबिक सर्वे की फोटो और वीडियोग्राफी भी की जा रही है।
चौथे दिन जारी रही जीपीआर से जांच
सर्वे के चौथे दिन भी ग्राउंड पेनिटरेटिंग रडार के माध्यम से सर्वे जारी रखा गया। सोमवार होने की वजह से सर्वे शुरू होने मे कुछ देर हुई जिसके कारण करीब 10.30 बजे सर्वे शुरू किया गया। जीपीआर तकनीक एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए एक मशीन के माध्यम से जमीन के अंदर 10 मीटर तक की जांच की जा सकती है। जमीन के ऊपर से ही यह मशीन अंदर क्या है इस बात का पता लगा लेती है। चौथे दिन तहखाने की भी जांच की गई।
पांचवें दिन चौथे दिन का सर्वे आगे बढ़ाया गया
पांचवे दिन तहखाने की ही जांच चलती रही। तहखाने की सालों से सफाई नहीं होने की वजह से वहां की सफाई करने में थोड़ी परेशानी हो रही है। सफाई के बाद ही वहां की फोटो और वीडियो लेना संभव होगा। हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि सर्वे में दोनों पक्ष सहयोग कर रहे हैं।