देवरिया। ज्ञानवापी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को कोर्ट ने एक दिसंबर तक स्थगित कर दिया है। इस मामले पर सोमवार को सुनवाई होनी थी। सोमवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने याचिका लगाई थी और श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा के मामले पर सवाल उठाए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष के द्वारा लगाई गई श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा के मुद्दे को सुनवाई योग्य बताया था।
क्या है मुस्लिम पक्ष की दलील
मंदिर पक्ष के ज्ञानवापी परिसर में मां श्रृंगार गौरी और अन्य देवी-देवताओं के होने का दावा करते हुए उनकी पूजा-अर्चना का अधिकार मांगा था। इसी पर मुस्लिम पक्ष ने अधिकार मांगे जाने की याचिका को चुनौती दी थी। मस्जिद पक्ष का कहना था कि पूजा स्थल कानून के अनुसार, किसी भी धार्मिक स्थल का वही चरित्र रहेगा जो 15 अगस्त 1947 को था। धार्मिक स्थल का चरित्र नहीं बदला जा सकता। ऐसे में परिसर में देवी-देवताओं के होने और पूजा-अर्चना का अधिकार मांगने वाला मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि यह कानून उस पर रोक लगाता है।
एएसआई ने रिपोर्ट सौंप मांगा था और समय
वाराणसी जिला अदालत ने पिछले हफ्ते ही एएसआई को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट जमा करने के लिए 10 और दिन का समय दिया है। पहले एएसआई को रिपोर्ट सौंपने के लिए 17 नवंबर तक का समय दिया गया था लेकिन शुक्रवार को उनके वकील ने अदालत से 15 दिन और मांगे थे। हिंदू पक्ष के मुताबिक, तकनीकी रिपोर्ट नहीं आने के कारण एएसआई ने और समय मांगा है। शनिवार को मामले की सुनवाई करते हुए जिला न्यायाधीश एके विश्वेश ने एएसआई को 28 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। आपको बता दें ज्ञानवापी के तहखाने से लेकर गुंबद तक का सर्व एएसआई ने 3 महीने से ज्यादा किया है। अब एएसआई को सर्वे में उपयोग हुए उपकरणों समेत रिपोर्ट देनी होगी।
कोर्ट ने बताया था साक्ष्य का विषय
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। मामले की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि 15 अगस्त 1947 को परिसर का धार्मिक चरित्र क्या था, यह साक्ष्य का विषय है। यह ट्रायल के दौरान साक्ष्य से तय होगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से अपनी दलीलों का शॉर्ट नोट जमा करने को कहा है।