super rich pollution caused by private jets and luxury lifestyleSuper rich pollution का प्रतीक—प्राइवेट जेट और लग्जरी जीवनशैली से बढ़ता कार्बन उत्सर्जन।

दे​वरिया। 1% यानी दुनिया की आबादी का वह हिस्सा जिसके पास सबसे ज्यादा दौलत है। अफसोसनाक यह है कि दुनिया में प्रदूषण फैलाने के लिए सबसे ज्यादा​ जिम्मेदार भी यही हैं। Oxfam की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में मान्य कार्बन उत्सर्जन तो इन्होंने सिर्फ 10 दिन में कर दिया। मतलब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साल भर में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन की जो औसत मात्रा मानी गई है, उतना तो इस 1% ने सिर्फ 10 दिन में ही कर दिया। जबकि इस 1% आबादी के 0.3% वे लोग जो सबसे ज्यादा अमीर हैं ने साल भर का उत्सर्जन तो सिर्फ 3 दिन में ही कर डाला। Oxfam ने ब्रिटेन के चांसलर को अपने देश के उन अमीरों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का अनुरोध किया, जिन्होंने हद से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन किया है। लेकिन सुपररिच के प्रभाव और उच्च स्तर पर उनके संपर्कों की वजह से उनपर किसी तरह का टैक्स लगा पाना भी संभव नहीं हुआ।

बढ़ती गर्मी से गरीब, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे

दुनिया के सुपररिच के फैलाए गए इस कार्बन कचरे की चपेट में पूरी धरती आ रही है, लेकिन इससे सबसे ज्यादा बुरी हालत दुनिया के सबसे गरीब देशों की हो रही है, जिनकी धरती को प्रदूषित करने की हिस्सेदारी न के बराबर है या तो है ही नहीं। दुनिया भर के गरीब, Lower Middle Class, महिलाएं और बच्चे इससे सबसे ज्यादा त्रस्त हैं, क्योंकि कार्बन उत्सर्जन से धरती के बढ़ते तापमान का सबसे पहला दुष्प्रभाव यही झेलते हैं। UNICEF की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में लगभग 24.2 करोड़ बच्चों को चरम मौसम, गर्मी, बाढ़ और तूफानों के कारण स्कूल न जा पाने का सामना करना पड़ा; जिनमें अधिकांश कम और मध्य-आय वाले देशों में प्रभावित थे।

बढ़ता प्रदूषण गरीब देशों को और ज्यादा गरीब बना देगा

प्रदूषण की वजह से धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे आम आदमी का बिजली बिल और गर्मी से खुद को बचाने का ​खर्च बढ़ रहा है। जब राष्ट्र के स्तर पर देखें तो पता चलेगा कि दुनिया के सबसे गरीब देश जो अभी ही अपनी आबादी को भरपेट खाना नहीं खिला पा रहे। आधारभूत Infrastructure तक उपलब्ध नहीं है। उनका जिंदा रहने का खर्च इतना ज्यादा बढ़ जाएगा कि वे और गरीब होते जाएंगे। अफ्रीका के ज्यादातर देश इसी हालत में हैं।

Private Jet Industry को बढ़ावा दे रहे Super Rich

दुनिया भर के Super Rich सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली Private Jet Industry को बढ़ावा दे रहे हैं। एक प्राइवेट जेट साल भर में औसतन 19 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड से ज्यादा छोड़ता है। यह साल भर में 4 लाख पेट्रोल कारों के चलने से होने वाले प्रदूषण जितना है। कार्बन उत्सर्जन पर साल 2015 में हुए Paris agreement के तहत Global Heating limit 1.5 Degree C से ज्यादा ऊपर बढ़ने से रोकने के लिए दुनिया के इन 1% Super Rich साल 2030 तक 97% कार्बन उत्सर्जन घटाना होगा, जबकि वे हर साल नए जेट का ऑर्डर दे रहे हैं।

हर साल 700 से ज्यादा Private Jet बिक रहे

https://privatejetcardcomparisons.com के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 सालों से हर साल 700 से ज्यादा प्राइवेट जेट खरीदे गए। दुनिया में सबसे ज्यादा प्राइवेट जेट अमेरिका के रईसों के पास हैं। यहां 15000 से ज्यादा प्राइवेट जेट हैं। यह दुनिया में Super Rich के पास मौजूद कुल Private Jet का करीब 65% है। मैक्सिको के रईसों के पास करीब 1 हजार प्राइवेट जेट हैं तो दुनिया को मिलने वाले ऑक्सीजन का 30% देने वाले अमेजन वर्षावनों वाले देश ब्राजील के Super Rich के पास भी 775 प्राइवेट जेट हैं। आंकड़ों में समझें तो

  • 2021 710 प्राइवेट जेट बिके
  • 2022 712 प्राइवेट जेट बिके
  • 2023 730 प्राइवेट जेट बिके
  • 2024 764 प्राइवेट जेट बिके
  • 2025 784 प्राइवेट जेट बिके (अभी आंकड़े फाइनल नहीं हैं)
2021 से 2025 के बीच दुनिया भर में हर साल प्राइवेट जेट की बिक्री लगातार बढ़ती गई, जो अमीर वर्ग की बढ़ती विलासिता और उससे जुड़े कार्बन उत्सर्जन की ओर इशारा करती है।

भारत Private Jet का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बना

ऑस्ट्रेलिया और भारत समेत एशिया के तीन देश Private Jet के नए बाजार के तौर पर विकसित हो रहे हैं। भारत, जापान और सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया के रईसों ने साल 2019 के बाद सबसे ज्यादा Private Jet के ऑर्डर दिए। सिर्फ भारत का ही बाजार 2019 के मुकाबल 2025 में 25% बढ़ा। यह इस वक्त दुनिया में सबसे ज्यादा है। अमेरिका के बाद ये Private Jet Industry के सबसे बड़े बाजार बन रहे हैं। यहां के Super Rich दुनिया के सबसे ज्यादा Luxury Private Jet खरीद रहे हैं।

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