देवरिया। गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में बने चेनाब रेलवी ब्रिज पर मेमू चलाकर इस ब्रिज का ट्रायल लिया गया। इसे ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना के तहत बनाया गया है। चेनाब पुल दुनिया का सबसे ऊंचा पुल भारत में होने का गौरव प्रदान करता है। दुनिया के किसी भी दूसरे देश में इतनी ऊंचाई पर रेलवे पुल का निर्माण अभी तक नहीं हुआ है। यह एक स्टील आर्च ब्रिज है जो एक बेहतरीन आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग का उदाहरण पेश कर रहा है। आइए जानते हैं इस पुल की और क्या-क्या खासियत है।
एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊंचा, उतना ही भव्य भी
359 मीटर ऊंचा चेनाब पुल देखने भी बड़ा भव्य और खूबसूरत दिखाई देता है। दो पहाड़ियों को जोड़ता आर्च बेस पर टिका पुल और नीचे बहती चिनाब नदी एक अलग ही दृश्य बनाती है। उंचाई पर होने की वजह से पुल और भी भव्य नजर आता है। इस पुल की विशालता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पुलि की कुल ऊंचाई पेरिस के एफिल टावर से भी 35 मीटर ज्यादा है। मौसम बदलने पर जब बादल घिरने लगते हैं तब चेनाब पुल का नजारा ऐसा होता है जैसे किसी ने बादलों के पार जाने के लिए पुल तैयार किया हो।
पुल पर 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी ट्रेन
चेनाब पुल की ऊंचाई नदी तल से 359 मीटर है। इस पुल की कुल लम्बाई 1315 मीटर है, जिसमें से पुल का 530 मीटर हिस्सा वायाडक्ट यानी सीधे जमीन पर टिका है और 785 मीटर हिस्से का आधार चेनाब वैली पर खड़ा है। जानकारों की मुताबिक इस पुल को 100 साल के बाद भी किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। इस पुल को ट्रेन की 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के हिसाब से डिजाइन किया गया है। चेनाब पुल का मुख्य आर्च स्पान 467 मीटर है, जो भारतीय रेल का सबसे लम्बा स्पान वाला आर्च ब्रिज है। जिसे क्षेत्र में पुल बनाया गया है वो भूकंप जोन 4 में आता है फिर भी पुल का निर्माण भूकंपीय क्षेत्र पांच को ध्यान में रखकर किया गया है।
विश्वस्तरीय स्टील, वेल्डिंग तकनीक से तैयार किया गया पुल
चेनाब पुल कुल 18 पिलर पर खड़ा है। जिसमें कांक्रिट और स्टिल दोनों तरह के पिलर बनाए गए हैं। पिलर को बनाने में विश्व स्तरीय स्टील और वेल्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। सबसे ऊंचा कांक्रीट का बना पिलर करीब 49.343 मीटर का है और सबसे ऊंचा स्टील पिलर करीब 130 मीटर ऊंचा है। पूरे ब्रिज को बनाने में 30 हजार टन से भी ज्यादा स्टील का उपयोग हुआ है। इतना ही नहीं DRDO की मदद से इस पुल को ब्लास्ट लोड के लिए भी डिजाइन किया गया है। पुल निर्माण के वक्त यहां चलने वाली केज हवाओं का भी ध्यान रखा गया है। इसका डिजाइन 266 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा को आसानी से झेल सकता है। पुल को तैयार करने में कुल 1486 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस पूरे पुल का निर्माण उच्च कोटी की इंजीनियरिंग का नमूना पेश करता है।