देवरिया। कहते हैं कुछ करने की चाहत और जुनून हो तो किसी भी तरह की कठिनाई क्यों ना आ जाए इंसान हार नहीं मानता और अपना लक्ष्य हासिल करके ही रहता है। इस बात को शीतल देवी ने एशियाई पैरा गेम्स 2023 में स्वर्ण लाकर सही साबित कर दिया है। शीतल देवी के दोनों हाथ नहीं हैं फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से ऐसे खेल में देश को स्वर्ण दिलाया है, जिसमें हाथों का ही पूरा उपयोग होता है। पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर शीतल देवी की सफलता की तारीफ की और उन्हें बधाई दी है।

कंपाउंड कॉम्पिटिशन में भी जीता गोल्ड

हांग्जो में चल रहे एशियाई पैरा गेम्स 2023 में शीतल देवी ने महिलाओं की इंडिविजुअल कंपाउंड तीरंदाजी स्पर्धा में सिंगापुर की अलीम नूर सयाहिदा को 144-142 से हराकर गोल्ड हासिल किया। है। इससे पहले उन्होंने मिश्रित टीम कंपाउंड स्पर्धा में भी राकेश कुमार के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया था। शीतल देवी विश्व की पहली तीरंदाज हैं जिनके दोनों हाथ नहीं हैं।

जन्म से ही नहीं हैं दोनों हाथ
16 साल की शीतल देवी किश्तवाड़ जिले के गांव लोई धार की रहने वाली हैं। शीतल के दोनों हाथ जन्म से ही नहीं हैं। उनका परिवार बेहद गरीब है। मां-बाप बकरियां पालकर परिवार का भरन-पोषण करते हैं। हाथ नहीं होने के बावजूद शीतल को शुरुआत से ही तीरंदाजी में रुचि थी। कुछ साल पहले सेना के एक अधिकारी ने कटरा स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी के कोच कुलदीपक वेदवान को शीतल के बारे में बताया। वहीं पर शीतल की खास ट्रेनिंग शुरू हुई। ट्रेनिंग के लिए खास धनुष तैयार कराया गया, जिसे हाथ से नहीं बल्कि पैर और छाती से चलाया जाता है। छह महीने की ट्रेनिंग में ही शीतल को तीरंदाजी में महारत हासिल हो गई। और एशियाई पैरा गेम्स मे शीतल ने खुद को साबित भी कर दिया है।

पीएम मोदी ने किया ट्विट
शीतल देवी के प्रदर्शन पर गर्व जताते हुए पीएम मोदी ने अपने एक्स अकाउंट लिखा-
“एशियाई पैरा खेलों में तीरंदाजी महिला व्यक्तिगत कंपाउंड ओपन स्पर्धा में असाधारण स्वर्ण पदक जीतने पर शीतल देवी पर गर्व है। यह उपलब्धि उनके धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।”