देवरिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में देश के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और औद्योगिक विकास से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। विशेष बात यह है कि इनमें से कई निर्णय सीधे तौर पर बिहार से जुड़े हैं, जिससे राज्य के विकास को नई गति मिलने की संभावना है। जहाज निर्माण, मेडिकल शिक्षा, सड़क और रेलवे परियोजनाओं, वैज्ञानिक शोध तथा रेलवे कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने वाले फैसलों को मंजूरी दी गई।

शिप मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

बैठक में सबसे बड़ा फैसला भारत की शिप मैन्युफैक्चरिंग और समुद्री क्षेत्र को मजबूती देने से जुड़ा रहा। कैबिनेट ने इसके लिए 69,725 करोड़ रुपये के पैकेज को हरी झंडी दी। इस पैकेज से देश में जहाज बनाने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। अनुमान है कि लगभग 45 लाख टन जहाजों का निर्माण किया जा सकेगा और करीब 30 लाख नए रोजगार पैदा होंगे। साथ ही, इस क्षेत्र में 4.5 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

पैकेज में शामिल कई अहम योजनाएं

  • शिप बिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (SBFAS) को वर्ष 2036 तक बढ़ा दिया गया है, जिसके लिए 24,736 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
  • जहाज तोड़ने के काम को बढ़ावा देने के लिए क्रेडिट नोट योजना लाई गई है, जिसके तहत 4,001 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
  • इन योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए एक राष्ट्रीय जहाज निर्माण मिशन बनाया जाएगा।

इसके साथ ही, कैबिनेट ने समुद्री विकास कोष (MDF) की स्थापना को भी मंजूरी दी। इसमें कुल 25,000 करोड़ रुपये होंगे।

  • इसमें से 20,000 करोड़ रुपये समुद्री निवेश कोष के रूप में होंगे, जिसमें सरकार अधिकतम 49% तक निवेश करेगी।
  • जबकि 5,000 करोड़ रुपये ब्याज प्रोत्साहन कोष के लिए रखे जाएंगे, जिससे जहाज निर्माण और समुद्री परियोजनाओं के लिए बैंक से लोन लेना आसान होगा।

मेडिकल सेक्टर में सुधार और सीटों की बढ़ोतरी

कैबिनेट मीटिंग में स्वास्थ्य शिक्षा पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। केंद्र सरकार की सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम (CSS) के तीसरे चरण को मंजूरी मिली है। इसके अंतर्गत सरकारी मेडिकल कॉलेजों और PG संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा।

  • इस योजना के तहत 5,023 नई MBBS सीटें जोड़ी जाएंगी।
  • साथ ही 5,000 नई PG सीटें भी बनाई जाएंगी, ताकि ज्यादा स्पेशलिस्ट डॉक्टर तैयार हो सकें।
  • हर नई सीट बनाने में लगभग 1.50 करोड़ रुपये तक का खर्च अनुमानित है।

इस फैसले से देश के साथ बिहार के मेडिकल ढांचे को भी मजबूत आधार मिलेगा।

बिहार में हाईवे प्रोजेक्ट

कैबिनेट ने बिहार में सड़क विकास से जुड़े एक बड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत नेशनल हाईवे 139W के साहेबगंज-अरराज-बेतिया खंड को चार लेन का बनाया जाएगा।

  • यह परियोजना लगभग 79 किलोमीटर लंबी होगी और इस पर 3,822.31 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
  • सड़क को ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट और हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा।
  • इसके निर्माण से पटना से बेतिया की दूरी तय करना आसान होगा और समय भी बचेगा।

इस सड़क परियोजना से वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों को सीधा फायदा होगा। ये सभी जिले नेपाल सीमा के करीब हैं, इसलिए सड़क संपर्क बेहतर होने से व्यापार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया प्रोजेक्ट

रेलवे कनेक्टिविटी सुधारने के लिए भी एक बड़ा फैसला लिया गया। बिहार की बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेलवे लाइन को डबल लाइन में बदलने की मंजूरी मिली।

  • यह लाइन 104 किलोमीटर लंबी है और इस पर 2,192 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
  • परियोजना से 1,434 गांवों और लगभग 13.5 लाख लोगों को सीधा लाभ होगा।
  • नालंदा, गया और नवादा जैसे पिछड़े जिलों का विकास होगा।
  • साथ ही, राजगीर, नालंदा और पावापुरी जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

रेलवे कर्मचारियों को बोनस

रेलवे क्षेत्र से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण निर्णय कर्मचारियों को लेकर लिया गया। कैबिनेट ने प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) योजना को मंजूरी दी।

  • इसके तहत देश भर के 10.90 लाख से ज्यादा रेलवे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
  • इस योजना के लिए 1,866 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • बोनस के बराबर होगा और प्रत्येक कर्मचारी को अधिकतम 17,951 रुपये तक का लाभ मिलेगा।

वैज्ञानिक अनुसंधान और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वैज्ञानिकों और 78 दिनों की सैलरी शोधकर्ताओं के लिए भी बड़ा कदम उठाया। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) तथा CSIR की एक योजना को मंजूरी दी गई है।

  • इस योजना पर 2,277.40 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
  • यह राशि 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-22 से 2025-26) के लिए निर्धारित है।
  • योजना का लक्ष्य युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (STEMM) के क्षेत्रों में शोध और करियर के अवसर प्रदान करना है।
  • युवा शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय R&D प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों में बड़े वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों से मार्गदर्शन मिलेगा।