देवरिया। संसद में बेहतरीन योगदान देने वाले 17 सांसदों को इस वर्ष ‘संसद रत्न पुरस्कार’ (Sansad Ratna 2025) से नवाजा गया है। ये सभी सांसद लोकसभा में अपनी सक्रियता, बहस में भागीदारी, सवाल पूछने और विधायी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, चार सांसदों को उनके संसदीय योगदान के लिए विशेष जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
किन्हें मिला Sansad Ratna 2025?
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार (Sansad Ratna 2025) से सम्मानित होने वाले सांसदों में भाजपा के रवि किशन (गोरखपुर), निशिकांत दुबे, स्मिता उदय वाघ, मेधा कुलकर्णी, प्रवीण पटेल, विद्युत बरन महतो और दिलीप सैकिया शामिल हैं। इनके अलावा एनसीपी (शरद) की सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत, नरेश म्हस्के, कांग्रेस की वर्षा गायकवाड़ और अन्य सांसदों को भी यह सम्मान प्राप्त हुआ।
चार सांसदों को विशेष जूरी पुरस्कार
तीन बार लोकसभा सदस्य रहे और लगातार संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने वाले चार सांसदों को विशेष जूरी पुरस्कार प्रदान किया गया। इनमें भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब (ओडिशा), एनसीपी की सुप्रिया सुले, आरएसपी के सांसद एनके प्रेमचंद्रन (केरल) और शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बार्ने शामिल हैं।
संसदीय समितियां भी सम्मानित
इस अवसर पर दो संसदीय समितियों को भी सम्मानित किया गया। भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली वित्त मामलों की स्थायी समिति और डॉ. चरणजीत सिंह चन्नी (कांग्रेस) की अध्यक्षता वाली कृषि मामलों की स्थायी समिति को उनकी गुणवत्ता पूर्ण रिपोर्टों और विधायी निगरानी में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
क्या है संसद रत्न पुरस्कार?
‘संसद रत्न पुरस्कार’ (Sansad Ratna 2025) की शुरुआत वर्ष 2010 में प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य संसद में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाले सांसदों को सम्मानित करना है। ये पुरस्कार सांसदों की सक्रियता, बहस में भागीदारी, प्रश्न पूछने और विधायी कामकाज में योगदान के आधार पर प्रदान किए जाते हैं। इस वर्ष के विजेताओं का चयन हंसराज अहीर (राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष) की अध्यक्षता वाली जूरी कमेटी द्वारा किया गया।