देवरिया। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए22 जनवरी की तारीख तय हुई है। अयोध्या और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरा देश इस दिन के इंतजार में है। प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी जोरों पर चल रही है। श्री राम मंदिर ट्रस्ट चाहता है कि पूरा देश इस प्राण प्रतिष्ठा में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पूर से शामिल हो, उसके लिए ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट कर भक्तों से निवेदन किया है और मंदिर से जुड़ी कुछ जानकारी भी दी है। आइए जानते हैं कैसे आप घर बैठे राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हो सकते हैं।

जहां बैठे हों, वहां करें भजन कीर्तन: राम मंदिर ट्रस्ट
राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष चंपत राय ने लोगों से अपील की है कि वे इस अवसर पर अपने पास पड़ोस के लोगों को एकत्रित कर भजन-कीर्तन, आरती, पूजा, शंखनाद, हनुमान चालीसा, सुंदर कांड का पाठ और श्रीराम जय जय राम विजय मंत्र का 108 बार सामूहिक पाठ करें। जिससे सारे देश का वातावरण राम मय हो जाए। चंपत राय ने विश्व भर के करोड़ों राम भक्तों से अपील की है कि 22 जनवरी2024 को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न होने के बाद अपने घरों पर दिये जला कर दीपोत्सव मनाएं। चंपत राय ने आम हिंदू समाज से अनुकूल समय पर रामलला के दर्शन के लिए भी अयोध्या आने की अपील की है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में पीएम मोदी की मौजूदगी में होने वाले प्राणप्रतिष्ठा के कार्यक्रम का दूरदर्शन पर लाइव प्रसारण किया जाएगा। इसके साथ ही अन्य न्यूज चैनल से भी यह कार्यक्रम प्रसारित किया जाएगा, जिसे लोग घर बैठे टीवी पर देख सकेंगे।
5 लाख गांवों में बंटेगा अपील पत्रक
ट्रस्ट के अध्यक्ष चंपत राय ने यह भी बताया कि अपील का पत्रक अक्षत के साथ 45 प्रांतों में करीब 5 लाख गांवों में वितरित किया जाएगा। अक्षत पूजन का कार्यक्रम 5 नवंबर को राम जन्म भूमि मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी प्रांतों के प्रतिनिधि बुलाएं गए हैं। उन्होंने ने आम जन को प्राण प्रतिष्ठाकार्यक्रम के बाद सपरिवार राम लला का दर्शन के लिए अयोध्या आने का आग्रह भी किया है।
पत्रक के साथ बताई गई मंदिर की विशेषता
एक्स अकाउंट पर लिखी अपील के साथ एक और पत्रक है, जिसमें राम मंदिर के निर्माण से जुड़ी खासियत का ब्योरा दिया गया है जो इस प्रकार है-
– नागर शैली में बना है मंदिर।
– मंदिर की लंबाई पूर्व पश्चिम 180 फुट, चौड़ाई 250 फुट,ऊंचाई 161 फुट।
– तीन मंजिला है मंदिर, जिसके प्रत्येक मंजिल की उंचाई 20-20 फुट।
– भूतल के गर्भ गृह में राम लला, दूसरे तल में राम दरबार।
– मंदिर में कुल पांच मंडप -, नृत्य मंडप ,गूढ मंडप, रंग मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप बने हैं।
– खंभों व दीवारों पर करीब 4 हजार देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी रहेंगी।
– 32सीढ़ियां चढ़ कर सिंहद्वार से प्रवेश मिलेगा ।
– दिव्यांगजनों और बुजुर्गो के लिए रैंप और लिफ्ट की है व्यवस्था।
– मंदिर के चारों ओर साढ़े4 मीटर की चौड़ाई में 732 मीटर लंबा परकोटा, जिसके चारों कोनों पर भगवान सूर्य शंकर गणपति देवी भगवती के मंदिर बनेंगे। परकोटा के दक्षिणी भुजा में हनुमान जी और उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा के मंदिर रहेंगे।
– परकोटा के बाहर हिस्सेद में भी महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ट, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी और अहिल्या जी के मंदिर प्रस्तावित हैं। कुबेर टीला पर शिव मंदिर और जटायू की प्रतिमा रहेगी ।