देवरिया। भारत के एथलीट रामबाबू ने चीन में चल रहे एशियन गेम्स में 35 किमी पैदल चाल में कांस्य पदक जीता है। यह मैडल इन्हें 35 किमी मिक्स वॉक इवेंट में मिला है। चीन में चल रहे एशियन गेम्स में जैसे-जैसे भारत के पदकों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे हमें देश के एक से बढ़कर एक होनहार खिलाड़ियों की प्रेरित करने वाली कहानियां भी जानने को मिल रही हैं। उन्हीं में से एक हैं एथलीट रामबाबू, जानते हैं कैसे उन्होंने एक छोटे से गांव से एशियन गेम्स तक का मुश्किल सफर पूरा किया।

हर तरह की तकलीफों से गुजरे हैं रामबाबू

रामबाबू ने अपने जीवन में बचपन से ही गरीबी झेली। वे उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के भैरवगांधी गांव के रहने वाले हैं और बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इसके बाद भी उन्होंने अपना हौसला और संघर्ष नहीं छोड़ा और आज दुनिया के जाने माने चैंपियनशिप एशियन गेम्स के जरिए पूरे देश और अपने गांव का नाम रोशन किया है। रामबाबू ने कोविड के दौरान मनरेगा में मजदूरी कर अपने परिवार का खर्च चलाया था। मजदूरी से पहले उन्होंने होटलों में वेटर का काम भी किया है। देश के लिए मेडल लाने पर आज पूरा देश उन्हें पहचानने लगा है। सोशल मीडिया पर रामबाबू रोल मॉडल बन गए हैं हर कोई उनके संघर्ष की कहानी को शेयर कर रहा है।

ओलंपिक में देश के लिए मेडल लाना है सपना
भारतीय खेल प्रेमियों और युवाओं के लिए आदर्श बन चुके रामबाबू का सपना यहीं पर पूरा नहीं होता, वो ओलंपिक में देश के लिए मेडल लाना चाहते हैं। उन्होंने बताया-“मेरा जीवन बचपन से ही स्ट्रगल से भरा रहा। गरीब परिवार और पिछड़े गांव से होने के कारण जीवन में काफी परेशानियों का सामने करना पड़ा। मेरी मां का सपना था कि उनका बेटा भविष्य में एक अच्छा जीवन गुजारे। आज एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज जीतना मेरे, मेरे परिवार और मेरे गांव वालों के लिए बहुत गर्व की बात है।”

रामबाबू को PM मोदी ने भी दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रामबाबू को कांस्य पदक जीतने पर बधाई दी और अपने एक्स अकाउंट पर लिखा- ”35 किमी रेस वॉक मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक के साथ भारत को गौरवान्वित करने के लिए रामबाबू और मंजू रानी को बधाई। यह सफलता इन अद्भुत एथलीटों द्वारा दिखाए गए जबरदस्त धैर्य और दृढ़ संकल्प के बिना संभव नहीं थी”