देवरिया। बोर्ड की परीक्षा पास ही है, ऐसे में बोर्ड परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को परीक्षा की तैयारियो को लेकर कई प्रकार का तनाव हो जाता है। इस एग्जाम स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए पीएम ने पिछले कुछ सालों से परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कड़ी में उन्होंने सोमवार को 11 बजे से 2024 में होने बोर्ड परीक्षाओं के विद्यार्थियों से बा की। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं के सवालों का जवाब भी दिया और उनसे कई महत्वपूर्ण टिप्स भी शेयर किए। इस दौरान पीएम 2 करोड़ स्टूडेंट्स और 14 टीचर्स से सीधे जुड़े हुए थे।

टीचर स्टूडेंट का रिश्ता परिवर्तन करने वाला होन चाहिए: PM
परीक्षा पे चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने एक बहुत अच्छी बात कही। उन्होंने कहा कि- “टीचर का छात्र से रिश्ता केवल जॉब वाला नहीं होना चाहिए बल्कि परिवर्तन करने वाला होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए एक ऐसी बात कही जो आपके दिल को छू जाएगी। पीएम मोदी ने टीचर और छात्रों के बीच आपसी रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर सालभर छात्र और शिक्षक के बीच नाता रहे तो स्टूडेंट का एग्जाम के वक्त तनाव की स्थिति खत्म हो जाएगी।”
पीएम ने पूछा क्या छात्र ने दिया शादी का कार्ड?
छात्र और शिक्षक के रिश्ते के बारे में कहते हुए पीएम ने कहा कि- “ मैं कभी-कभी टीचरों से पूछता हूं कि भाई आप 30 साल से टीचर हैं। जो बच्चे पहली बार यहां से पढ़ाई करके गए होंगे वे तो बड़े हो गए होंगे और उनकी शादी भी हो गई होगी। क्या आपका कोई छात्र अपनी शादी का कार्ड देना आया था? 99 फीसदी टीचर मुझे कहते हैं कि नहीं, कोई छात्र नहीं आया। मतलब हम केवल जॉब करते थे, हम जिंदगी नहीं बदलते थे। टीचर का काम जॉब बदलना या जॉब करना नहीं है बल्कि जिंदगी को संवारना है। छात्रों को सामर्थ्य देना है और वही परिवर्तन लाता है।

एग्जाम हॉल टेंशन से बचने पीएम की सलाह
एग्जाम हॉल में जाने के दौरान होने वाले तनाव से बचने का सुझाव देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पैरेंट्स को उत्साह के साथ बच्चे को एग्जाम हॉल में जाने देना चाहिए। एग्जाम हॉल में हमेशा आप जल्दी जाने की कोशिश करें। एग्जाम हॉल में गहरा सांस लीजिए और खुद में खोने की कोशिश की जाए। अब आपके हाथ में पेपर आएगा तो आपको तनाव महसूस नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमेशा क्वेश्वन पेपर को पढ़ लीजिए और उन्हें हल करने का समय तय कर लीजिए। छात्रों को हमेशा सवालों को लिखकर प्रैक्टिस करनी चाहिए।
खुद से स्पर्धा करें दोस्त से नहीं: पीएम मोदी
आजकल बच्चे पढ़ाई में अपने ही दोस्तों से कम्पीटिशन करते हैं, इसपर पीएम मोदी ने कहा- “आपके दोस्त से आपको किस चीज की स्पर्धा है? मान लीजिए 100 नंबर का पेपर है। आपका दोस्त अगर 90 नंबर ले आया तो क्या आपके लिए 10 नंबर बचे? आपके लिए भी 100 नंबर हैं। आपको उससे स्पर्धा नहीं करनी है आपको खुद से स्पर्धा करनी है। प्रतिस्पर्धा होना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हममें द्वेष पैदा हो जाए। बिना द्वेष के प्रतिस्पर्धा होने से सफलता हासिल करने में मदद लेगी। प्रधानमंत्री ने माता-पिता की तरफ से प्रतिस्पर्धा करवाने पर कहा कि माता-पिता को इस तरह की चीजों से बचना चाहिए। इसकी वजह से बच्चों की क्षमता घट सकती है। कभी कभी तो मैंने देखा है कि जो माता-पिता अपने जीवन में ज्यादा सफल नहीं हुए हैं, वे अपने बच्चों का रिपोर्ट कार्ड ही विजिटिंग कार्ड बना देते हैं। इस तरह से बच्चों के भीतर ही लगने लगता है कि उन्हें सब कुछ आता है, जो काफी नुकसानदायक है।
सामाजिक दबाव से निपटे के लिए दिए कई सुझाव
पीएम मोदी ने कहा कि- “शायद मुझे बताया गया कि परीक्षा पे चर्चा का सातवां एपिसोड है, जितना मुझे याद है कि ये सवाल हर बार पूछा गया है। इसका मतलब ये है कि सात साल में सात अलग-अलग बैच इस परिस्थिति से गुजर रही है। हर नई बैच को भी इन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों की बैच बदलती है, लेकिन टीचर्स की बैच इतनी जल्दी नहीं बदलती है। उन्होंने कहा कि टीचर्स ने अगर मेरे पुराने एपिसोड की बातों को छात्रों तक पहुंचाया हो तो इस समस्या को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। हर माता-पिता ने इस समस्या का सामना जरूर किया है। हमें किसी भी तरह के प्रेशर को झेलने के लिए सामर्थ्यवान बनाना चाहिए। रोते हुए बैठना नहीं चाहता है। जीवन में दबाव आता रहता है, लेकिन खुद को तैयार करना होता है। दबाव को हमें अपने तरीके से जीतने के तरीके का संकल्प लेना चाहिए। ”