देवरिया। 26 नवंबर को हर साल भारत संविधान दिवस मनाता है। यही वो दिन जब 1949 को भारत की संविधान पीठ ने हमारे संविधान को अंतिम रूप दिया था। भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में जाना जाता है। किसी भी लोकतंत्र की आत्मा वहां का संविधान होता है। इसलिए ये दिन देश के लिए इतना महत्व रखता है। साल 2024 में हमें अपने संविधान को अपनाए 75 साल पूरे हो गए। इस लिए देश ने इस बार कुछ अलग तरीके से संविधान दिवस मनाया।
राष्ट्रपति ने जारी किया 75 रुपए का सिक्का
संविधान के 75वें वर्षगाठ के के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 75 रुपए का स्मार्क सिक्का और डाक टिकट जारी किया। आपको बता दें कि खास मौकों पर जारी किए गए स्मारक सिक्के को सामान्य खरीद बिक्री के लिए उपयोग नहीं किया जाता है। इतना ही नहीं राष्ट्रपति ने संविधान की पहली संस्कृत प्रति और मैथली संस्करण का भी अनावरण किया। यह ऐतिहासिक समारोह नई दिल्ली के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित हुआ।
ग्राम पंचायतों में मनाया गया संविधान दिवस
संविधान दिवस के मौके पर केंद्र ने सभी ग्राम पंचायतों से लेकर नगरीय निकायों तक अपने स्तर पर संविधान दिवस मनाने के निर्देश दिए थे। सभी क संविधान दिवस पर संविधान की प्रस्तावना का पाठन भी करना था। केंद्र के निर्देशानुर हर छोटी बड़ी प्रशासनिक इकाइयों में संविधान दिवस का आयोजन और संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया गया।
राष्ट्रपति ने संविधान सभा की महिला सदस्यों को किया याद
राष्ट्रपति ने 75 वर्ष पहले संविधान को अपनाए जाने के क्षण को याद करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने संविधान सभा की उन 15 महिला सदस्यों के योगदान का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने देश के आधारभूत दस्तावेज को आकार देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। साथ ही, उन्होंने सभी भारतीयों से संवैधानिक आदर्शों को अपनाने और अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि देश को साल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए।