देवरिया। बुधवार को पीएम मोदी ने राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने विपक्ष के उठाए गए हर सवाल का जवाब दिया। पीएम ने कांग्रेस को परजीवी कहते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा। इस दौरान विपक्ष वेल में आकर हंगामा और नारेबाजी करते रहे। पीएम मोदी हंगामे के बीच अपना संबोधन देते रहे। विपक्ष ने सदन से वॉकआउट भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान राज्यसभा से विपक्ष के सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के वॉकआउट की सभापति जगदीप धनखड़ ने भर्त्सना की और कहा कि इससे देश के 140 करोड़ लोग आहत होंगे। आज वो सदन छोड़कर नहीं, मर्यादा छोड़कर गए हैं। ये हमारा और आपका अपमान नहीं, सदन का अपमान है। वह मुझे पीठ दिखाकर नहीं गए हैं, भारत के संविधान को पीठ दिखाकर गए हैं। बहुत दुखी हूं, भारत के संविधान का इतना अपमान, इतना बड़ा मजाक। आशा करता हूं कि वे आत्ममंथन करेंगे। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारीत होने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है।
हमारा फोकस देश के गरीब, युवा और नारी शक्ति पर: PM
पीएम मोदी ने कहा कि- “छोटे-छोटे शहर भारत के विकास में इतिहास रचने वाले हैं। विकास यात्रा में चार प्रमुख स्तंभ हैं। उनका सशक्तिकरण, उनको अवसर बहुत बड़ा बदलाव लाने वाले हैं। हमारे देश के गरीब, हमारे देश के युवा और हमारे देश की नारी शक्ति। हमारा जो फोकस है, उसे हमने रेखांकित किया है। यहां के कई साथियों ने खेती और किसानी को लेकर विस्तार से अपने विचार रखे हैं। अनेक बातें सकारात्मक रूप से भी रखी है। किसानों को लेकर सभी सदस्यों को और उनकी भावनाओं का आदर करता हूं। बीते 10 वर्ष में हमारी खेती हर प्रकार से लाभकारी हो, इस पर हमने ध्यान केंद्रित किया है और अनेक योजनाओं से ताकत देने का प्रयास किया है। चाहे फसल के लिए ऋण हो, नए बीज उपलब्ध हो, खाद की कीमत उचित हो। चाहे एमएसपी पर खरीद की बात हो। एक प्रकार से बीज से बाजार तक हमने किसानों के लिए हर व्यवस्था को बहुत माइक्रो प्लानिंग के साथ मजबूती देने का भरसक प्रयास किया है। हमने कृषि को एक व्यापक स्वरूप में देखा है और मछुआरों को भी किसान क्रेडिट कार्ड मुहैया कराया है।
“आने वाले पांच साल मूल सुविधाओं के सैचुरेशन के हैं”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि- “यहां कुछ लोग बैठे हैं जो ये कहते हैं कि इसमें क्या है, ये तो होना ही है। ये ऑटो पायलट मोड में सरकार चलाने के आदी हैं, इंतजार करने में विश्वास रखते हैं। हम परिश्रम में विश्वास रखते हैं। आने वाले पांच साल मूल सुविधाओं के सैचुरेशन के हैं। सामान्य मानविकी के लिए गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए जिस प्रकार के गवर्नेंस की जरूरत होती है, हम वह उपलब्ध कराएंगे। आने वाले पांच साल गरीबी के खिलाफ लड़ाई के निर्णायक वर्ष हैं। ये देश गरीबी के खिलाफ लड़ाई में विजयी होकर रहेगा, ये 10 साल के अनुभव के आधार पर बहुत विश्वास के साथ कह रहा हूं। जब देश दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनेगा तो इसका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ने वाला है। विकास के विस्तार के अनेक अवसर उपलब्ध होने वाले हैं।”
“ये चुनाव 10 साल की सिद्धियों पर तो मुहर”
पीएम मोदी ने कहा कि ये चुनाव 10 साल की सिद्धियों पर तो मुहर है ही, भविष्य की नीतियों पर भी मुहर है। देश की जनता का एकमात्र भरोसा हमपर होने के कारण हमें अवसर दिया है। पिछले 10 वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था को 10 से पांच नंबर पर पहुंचाने में सफलता मिली है और जैसे-जैसे नंबर निकटता की स्थिति की ओर पहुंचता है तो चुनौतियां भी बढ़ती हैं और कोरोना के कठिन कालखंड और संघर्ष की वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद हम हमारी अर्थव्यवस्था को 10 से पांच नंबर पर पहुंचाने में सफल रहे हैं। इस बार देश की जनता ने हमें पांच नंबर से तीन नंबर की इकोनॉमी पर पहुंचाने के लिए जनादेश दिया है और मुझे विश्वास है कि जनता ने जो जनादेश दिया है, हम भारत को टॉप तीन में पहुंचाकर रहेंगे।
देशवासियों ने भ्रम की राजनीति को ठुकराया है: PM
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि- “देशवासियों ने भ्रम की राजनीति को ठुकराया है और भरोसे की राजनीति पर मुहर लगाई है। मेरे जैसे बहुत से लोग हैं सार्वजनिक जीवन में जिनके परिवार से कोई सरपंच भी नहीं रहा है, राजनीति से कोई सरोकार नहीं रहा है। लेकिन आज महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे हैं। उसका कारण बाबासाहब का दिया संविधान है। हमारे जैसे लोग यहां तक पहुंचे हैं तो उसका कारण संविधान है और जनता ने मुहर लगाई। संविधान हमारे लिए आर्टिकल्स का संग्रह मात्र नहीं है, उसकी स्पिरिट भी बहुत महत्वपूर्ण है। किसी भी स्थिति में संविधान हमारा मार्गदर्शन करने का काम करता है। मैंने जब लोकसभा में हमारी सरकार की तरफ से कहा गया कि हम 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाएंगे, हैरान हूं कि जो आज संविधान की प्रति लेकर कूदते रहते हैं, उनलोगों ने विरोध किया था कि 26 जनवरी तो है। आज संविधान दिवस के माध्यम से संविधान की भावना, रचना में क्या भूमिका रही है, देश के गणमान्य महापुरुषों ने संविधान में किन कारणों से कुछ चीजों को छोड़ने का निर्णय किया, इसके विषय में स्कूल कॉलेजों में चर्चा हो।”
हमारी सरकार के 10 साल हुए हैं, 20 साल अभी बाकी है: PM
पीएम मोदी ने कहा कि 60 साल बाद ऐसा हुआ है कि कोई सरकार तीसरी बार वापस आई है। छह दशक बाद हुई ये घटना असामान्य घटना है। कुछ लोग जानबूझकर मुंह फेरकर बैठे रहे। उनको समझ नहीं आया। जिनको समझ आया उन्होंने हो-हल्ला उस दिशा में किया कि देश की जनता की विवेक-बुद्धि पर कैसे छाया कर दिया जाए, इसकी कोशिश हुई। पिछले दो दिन से देख रहा हूं कि पराजय भी स्वीकार हो रहा है, दबे मन से विजय भी स्वीकार हो रहा है। कांग्रेस के हमारे कुछ साथियों को हृदय से धन्यवाद करना चाहता हूं कि नतीजे आए तब से एक साथी की तरफ से देख रहा था उनकी पार्टी समर्थन तो नहीं कर रही थी लेकिन अकेले झंडा लेकर दौड़ रहे थे। जो ये कह रहे थे उनके मुंह में घी-शक्कर। हमारी सरकार के 10 साल हुए हैं, 20 साल अभी बाकी है। हमारी सरकार का एक तिहाई हुआ है, दो तिहाई अभी बाकी है।
“पद्म अवॉर्ड में भी ट्रांसजेंडर को अवसर देने में हमारी सरकार आगे आई”
आजादी के बाद अनेक दशकों दक जिनको कभी पूछा नहीं गया, हमारी सरकार उनको पूछती तो है, पूजती भी है। दिव्यांग भाई-बहनों के साथ उनकी कठिनाइयों को समझते हुए गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में काम किया है। हमारे समाज में किसी न किसी कारण से एक उपेक्षित वर्ग ट्रांसजेंडर वर्ग है। हमारी सरकार ने ट्रांसजेंडर साथियों के लिए कानून बनाने का काम किया है। पश्चिम के लोगों को भी आश्चर्य होता है कि भारत इतना प्रोग्रेसिव है। पद्म अवॉर्ड में भी ट्रांसजेंडर को अवसर देने में हमारी सरकार आगे आई।
“140 करोड़ देशवासियों ने जो जनादेश दिया है, उसको ये पचा नहीं पा रहे”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों ने जो जनादेश दिया है, उसको ये पचा नहीं पा रहे हैं। कल इनके सारे हथकंडे फेल हो गए। आज इनमें लड़ने का हौसला भी नहीं रहा। मैं तो कर्तव्य से बंधा हुआ है। देश का सेवक हूं। उन्होंने फर्टिलाइजर को लेकर कहा कि वैश्विक संकटों की वजह से कुछ समस्याएं उत्पन्न हुईं लेकिन हमने 12 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर इसका असर किसानों पर नहीं पड़ने दिया। हमने कांग्रेस के मुकाबले कहीं अधिक पैसा किसानों तक पहुंचाया। अन्नभंडारण का विश्व का सबसे बड़ा अभियान हमने हाथ में लिया और इस दिशा में काम चल पड़ा है। फल और सब्जी की तरफ हम चाहते हैं कि किसान मुड़े और उसके भंडारण की दिशा में हम काम कर रहे हैं। सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर हमने देश की विकास यात्रा को रफ्तार देने की कोशिश की है।
“कांग्रेस की मानसिकता दलित-पिछड़ों की रही है”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि- “चुनाव नतीजों के बाद मार्केट में तो उछाल है ही, कांग्रेस के साथी भी बड़े खुश हैं। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस खुशी की वजह क्या है। क्या ये हार की हैट्रिक के लिए है, क्या ये खुशी नर्वस नाइंटीज का शिकार होने के लिए है, क्या ये लॉन्च की तीसरी असफल कोशिश के लिए है। खड़गे जी का बड़ा सम्मान करता हूं। पराजय का ठीकरा जिन पर फूटना चाहिए था, उनको इन्होंने बचा लिया और खुद दीवार बनकर खड़े हो गए। ये परिवार बच निकला। कांग्रेस की मानसिकता दलित-पिछड़ों की रही है। स्पीकर चुनाव में हार तय थी, दलित को आगे कर दिया। हार तय थी तो सुशील कुमार शिंदे और मीरा कुमार को आगे कर दिया था।”
“प्रधानमंत्री के ऊपर एनएससी बैठ जाना, कौन से संविधान में से लाए थे”
भूल गए 1977 का चुनाव, जब रेडियो-अखबार सब बंद थे। देश की जनता ने हमें जनादेश दिया था। देश जानता है कि संविधान की रक्षा कोई कर सकता है तो हमलोग ही कर सकते हैं। जब खड़गे जी ऐसा बोलते हैं तब पीड़ा होती है। संविधान पर जब बुल्डोजर चला दिया गया, करोड़ों लोगों को यातनाएं दी गईं और उनका जीना मुश्किल कर दिया गया था, क्या वो भूल गए। वह कौन सा संविधान था जिसको लेकर आपने सात साल लोकसभा चलाई और सत्ता की मौज लेते रहे, आप हमें संविधान सिखाते हो। दर्जनों आर्टिकल्स को, संविधान की आत्मा को छिन्न-विछिन्न करने का पाप इन लोगों ने किया था। आपके मुंह से संविधान की बात शोभा नहीं देती, आप पाप करके बैठे हुए लोग हो। पिछली सरकार में 10 साल क्या हुआ था। ये कैबिनेट में थे खड़गे जी। प्रधानमंत्री संवैधानिक पद है। प्रधानमंत्री के ऊपर एनएससी बैठ जाना, कौन से संविधान में से लाए थे ये पद, कौन सा संविधान अनुमति देता है आपको। वह कौन सा संविधान है जो एक सांसद को कैबिनेट के निर्णय को फाड़ देने का हक दे देता है। हमारे देश में लिखित प्रोटोकॉल की व्यवस्था है। कोई मुझे बताए ये कौन सा संविधान था जो संवैधानिक पदों पर बैठेलोग बाद में औरा एक परिवार को प्राथमिकता देता है। आप लोग तो इंडिया इज इंदिरा, इंदिरा इज इंडिया का नारा देकर के जिए हो। आप संविधान को कभी जी नहीं पाए हो। कांग्रेस संविधान की सबसे बड़ी विरोधी है, उसके जेहन में है।
“जहां इनको सूट नहीं करता है तब इनको सांप सूंघ जाता है”
ऐसे संवेदनील मामलों में भी राजनीति जब होती है तब देशवासियों को, विशेषकर महिलाओं को अत्यंत पीड़ा होती है। विपक्ष का जो सलेक्टिव रवैया है, वह बहुत चिंताजनक है। मैं किसी राज्य के खिलाफ नहीं बोल रहा हूं और ना ही राजनीतिक स्कोर करने के लिए बोल रहा हूं। कुछ समय पहले मैंने बंगाल से आया एक वीडियो देखा। कुछ लोग महिला को पीट रहे हैं और वह चीख रही है लेकिन लोग वीडियो बनाने में लगे हैं। जो संदेशखाली में हुआ, वह भी बड़ा भयावह है। बड़े-बड़े दिग्गज मैं सुन रहा हूं कल से, उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकले, जब दिग्गज लोग भी इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज करते हैं तब देश को पीड़ा होती ही है, माताओं और बहनों को अधिक पीड़ा होती है। राजनीति इतनी सलेक्टिव हो, जहां इनको सूट नहीं करता है तब इनको सांप सूंघ जाता है।