देवरिया। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद 19 जून को नरेंद्र मोदी बिहार पहुंचे। यहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस का उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान उनके साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहे। एयरपोर्ट पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और राज्य के सहकारिता मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने उनका स्वागत किया, इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे। उद्घाटन के बाद पीएम ने अपना संबोधन में दिया जिसमें उन्होंने नालंदा के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताया।
आग की लपटे ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं: पीएम
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि- “नालंदा केवल एक नाम नहीं है। नालंदा एक पहचान है, एक सम्मान है। नालंदा एक मूल्य है, मंत्र है, गौरव है, गाथा है। नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं। आज हायर एजुकेशन के लिए भारत में ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थान खुल रहे हैं। अब भारत के शिक्षण संस्थान ग्लोबल हो रहे। नालंदा विवि को भी दुनिया के हर इलाके में जाना है। दुनिया बुद्ध के इस देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाह रही है।”
“आज पूरा विश्व योग को अपना रहा है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि- “भारत में शिक्षा मानवता के लिए हमारे योगदान का एक माध्यम मानी जाती है। हम सीखते हैं ताकि अपने ज्ञान से मानवता का भला कर सकें। 2 दिन के बाद ही 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। आज भारत में योग की सैंकड़ों विधाएं मौजूद हैं। हमारे ऋषियों ने इसके लिए कितना गहन शोध किया होगा लेकिन किसी ने योग पर एकाधिकार नहीं बनाया। आज पूरा विश्व योग को अपना रहा है। योग दिवस एक वैश्विस उत्सव बन गया है।”
“नालंदा कभी भारत की परंपरा और पहचान का जीवंत केंद्र हुआ करता था”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि- “मैं बिहार के लोगों को भी बधाई देता हूं। बिहार अपने गौरव को वापस लाने के लिए जिस तरह विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। नालंदा का ये परिसर उसी की एक प्रेरणा है। पीएम मोदी ने कहा हम सभी जानते हैं कि नालंदा कभी भारत की परंपरा और पहचान का जीवंत केंद्र हुआ करता था। शिक्षा को लेकर यही भारत की सोच रही है। शिक्षा ही हमें गढ़ती है, विचार देती है और उसे आकार देती है।”
“दुनिया के कई देशों से आज यहां कई विद्यार्थी आने लगे हैं”
प्राचीन नालंदा में बच्चों का प्रवेश उनकी पहचान, उनकी राष्ट्रीयता को देख कर नहीं होता था। हर देश हर वर्ग के युवा हैं यहां पर। नालंदा विश्वविद्यालय के इस नए परिसर में हमें उसी प्राचीन व्यवस्था को फिर से आधुनिक रूप में मजबूती देनी है और मुझे ये देख कर खुशी है कि दुनिया के कई देशों से आज यहां कई विद्यार्थी आने लगे हैं।
पीएम मोदी की गाइड बनी गौतमी भट्टाचार्या की हो रही चर्चा
पीएम मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय परिसर के उस हिस्सा को करीब से जाना जो अब सिर्फ अवशेष के रूप में बच गया है। इस दौरन उनके साथ भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण की पटना सर्किल हेड गौतमी भट्टाचार्या मौजूद रहीं। उन्होनों पीएम को नालंदा से जुड़ी हर एक जानकारी विस्तार से दी। पीएम के यूनिवर्सिटी में मुआयने के दौरान वीडियो में वो पूरे समय नजर आ रही हैं जिसकी वजह से गौतमी भट्टाचार्या सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनीं हुई हैं। आपको बता दें नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना पांचवी शताब्दी में हुई थी, जिसने दुनिया भर से छात्रों को आकर्षित किया। विशेषज्ञों के अनुसार 12 वीं शताब्दी में आक्रमणकारियों की ओर से नष्ट किए जाने से पहले यह प्राचीन विश्वविद्यालय 800 वर्षों तक फलता-फूलता रहा।