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मोरबी हादसा: किसी ने गर्भवती को दम तोड़ते देखा तो किसी ने पूरी रात लोगों की मदद की, भावुक हुए पीएम मोदी

देवरिया। गुजरात के मोरबी के लिए रविवार का दिन काल बनकर आया। मच्छु नदी पर बना केबल पुल टूटन से अब तक 140 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर आ चुकी है। 177 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। हादसे में घायल हुए लोगों का इलाज जारी है। अपनों की तलाश में लोग बिलख रहे हैं। कोई हादसे को याद कर सिहर रहा है, तो किसी के आंसू गुहार लगा रहे हैं। इलाज, मुआवजे, राहत और बचाव के बीच इस लापरवाही की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

भावुक हुए पीएम मोदी
गुजरात दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को मोरबी जाएंगे। बनासकांठा में हादसे के विषय में बोलते हुए पीएम मोदी भावुक हो गए। इसी बीच पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि ब्रिटिश काल में बना ये पुल करीब 140 साल पुराना है।


हादसे की तस्वीरों ने दहलाया दिल
छठ पूजा के लिए गए लोगों को ये नहीं पता था कि कुछ ही देर में ये केबल पुल काल बन जाएग। 100 लोगों का क्षमता वाले इस ब्रिज पर 500 लोग मौजूद थे। पुल पर लटकते फिर एक झटके से नदी में गिरते लोगों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। 5 दिन पहले आम लोगों के लिए खुले इस ब्रिज ने सैकड़ों परिवारों को कभी न भूलने वाला दर्द और चश्मदीदों को कभी न भूलने वाली याद दी है। मौके पर मौजूद लोगों ने जब हादसे का जिक्र किया तो भावुक हो उठे। किसी ने पूरी रात लोगों को निकालने की कोशिश की, तो किसी ने अपनी आंखों के सामने गर्भवती की मौत देखी। कोई परिवार खोकर बदहवास उम्मीद लिए घूमता रहा, तो कोई मदद मांगते-मांगते फफक कर रो पड़ा। मोरबी में रविवार को मौत की काली रात थी और सोमवार मातम का सवेरा लेकर आया।


हादसे को याद कर सिहर उठते हैं चश्मदीद
इस हादसे का शिकार हुए एक शख्स ने बताया कि केबल पुल बहुत तेज हिल रहा था फिर टूट गया और कई लोग नदी में जा गिरे। कई केबल पकड़कर जान बचाने के लिए जूझ रहे थे। हादसे में अपनी बहन को खो चुका एक युवक आपबीती बताते-बताते रो पड़ा। इस अनहोनी में बचे अनिल बताते हैं कि वे अपनी पत्नी, बच्चों और चाची के साथ वहां गए थे। उनकी किस्मत अच्छी थी कि वे पुल से उतरकर नीचे आ गए थे। हादसे में उनकी पत्नी को चोट आई है, जिनका इलाज जारी है।


चाय विक्रेता ने आंखों के सामने देखी मौत
आस-पास मौजूद लोगों ने बताया कि कैसे उन्होंने घायलों की जान बचाई। हर रविवार यहां चाय बेचने वाले एक शख्स ने बताया ‘सब कुछ ही सेकेंड के अंदर हो गया। सब मेरी आंखों के सामने हुआ। कुछ लोग केबल पकड़कर लटक रहे थे, जैसे ही उनकी पकड़ ढीली हुई, पानी में चले गए। मैं पूरी रात सोया नहीं और लोगों की मदद की। 7-8 महीने की गर्भवती महिला को मरते हुए देखना दिल दहला देने वाला था। मैंने जीवन में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। हर तरफ लोग मर रहे थे, मैं जितने लोगों को अस्पताल ले जा सकता था, लेकर गया’। चाय विक्रेता के सामने एक छोटी सी बच्ची ने अंतिम सांस ली, जिसके बारे में बताते-बताते उसके आंसू निकलने लगे।

पूरी रात लोगों ने की मदद

हसीना नाम की दूसरी चश्मदीद अपनी आपबीती साझा करते हुए भावुक हो गई। उसने बताया ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और मैं इसे शब्दों से नहीं बता सकती हूं। बच्चे भी थे। मैंने अपने परिवार के सदस्यों के रूप में लोगों की मदद की। मैंने शवों को अस्पताल ले जाने के लिए अपनी गाड़ी भी दी। प्रशासन ने भी मदद की। वहां मौजूद सभी लोग आगे आए और एक-दूसरे की मदद की। मैंने कभी ऐसा कुछ नहीं देखा।’

हादसे में मृत हुए लोगों की संख्या बढ़ सकती है। जांच के लिए टीम बनाई गई है। राहत और बचाव कार्य चल रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। लेकिन सवाल वहीं का वहीं है कि आखिर कब तक लोगों की जान इतनी सस्ती रहेगी कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती रहे।



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