देवरिया। देश में बोर्ड की परीक्षाएं शुरु होने से पहले प्रधानमंत्री हर साल ‘परीक्षा पर चर्चा’ (Pariksha Par Charcha)कार्यक्रम करते हैं। इसमें वो बोर्ड परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स से बात करते हैं। इस चर्चा में वो बच्चों को परीक्षा की तैयारी कैसे करने ही और इस दौरान तनाव से कैसे बचना है, इस पर कुछ टिप्स देते हैं। इस दौरान पीएम सिर्फ छात्रों से ही बात नहीं करते बल्की पैरेंट्स भी बात करते हैं। (Pariksha Par Charcha) परीक्षा पर चर्चा के लिए गवर्मेंट का एक पोर्टल है जिस पर एक महीने पहले ही रजिस्ट्रेशन शुरु कर दिए जाते हैं। साल 2025 में यह परीक्षा पर चर्चा का यह 8वां एडिशन है।

बच्चों से सहज तरीके से बात करते हैं पीएम

परीक्षा पर चर्चा में (Pariksha Par Charcha)पीएम बच्चों से दोस्तों की तरह बात करते नजर आए। उन्होंने लगभग 1 घंटे बच्चों के सवालों का जवाब दिया। पीएम ने बच्चों के सवालों का जवाब कहानियों और उदाहरण के जरिए बड़ी सहजता से दिए। इस बीच कई बार बच्चे और पीएम हंसी-मजाक करते भी नजर आए। पीएम ने बच्चों को तनाव मुक्त  रहकर परीक्षा की तैयारी करने के टिप्स भी दिए। इस बार परीक्षा पर चर्चा का मुख्य विषय ही “तनाव मुक्त परीक्षा” था। पीएम ने स्टूडेंट्स से चर्चा का वीडियो अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट भी किया है।

Pariksha Par Charcha में बच्चों को मिले टिप्स

पीएम ने बच्चों के फेल होने पर कहा कि – “ स्कूलमें 30-40% बच्चे फेल होते हैं, उनका क्या होता है। देखिए फेल होने से जिंदगी रुक नहीं जाती है। आपको तय करना होगा कि जीवन में सफल होना है कि किताबों से। जीवन में सफल होने का एक उपाय ये होता है कि आप अपने जीवन की जितनी विफलताएं हैं, उसे अपना टीचर बना लें। अपनी विफलताओं को टीचर बना लें। जीवन सिर्फ परीक्षाएं नहीं हैं। इसे समग्रता में देखना चाहिए। हमारे अंदर परमात्मा ने कुछ कमियां भी रखी हैं कुछ विशेषताएं भी दी हैं। विशेषताओं पर ध्यान दीजिए। फिर कोई नहीं पूछेगा कि 10वीं-12वीं में कितने मार्क्स आए थे। जीवन बोलना चाहिए, मार्क्स नहीं।

तनाव से निकलने का बताया उपाय

पीएम ने बच्चों को स्ट्रेस से निकलन के लिए टिप्स देते हुए कहा कि- ये दिक्कत शुरू कहां से हुई? पहले हम सारी बातें अपने भाई बहनों को, मम्मी को बता देते थे। धीरे-धीरे बड़े होते हुए हम बताना बंद करते चले जाते हैं। अपने मन में सारी बातें रख लेते हैं। अपने आप को कट करते जाते हैं। धीरे-धीरे वो डिप्रेशन बन जाता है। आपको कोशिश करनी चाहिए, आपके मन के अंदर जो दुविधाएं हैं खुलकर किसी से कह सकें। नहीं बोलोगे तो एक समय पर विस्फोट हो जाएगा। जैसे कुकर की सीटी बजती है। प्रेशर निकलता रहता है समय समय पर। नहीं निकलेगा तो कुकर फट जाए।

परीक्षा के नाम का क्यों है डर?

पीएम ने कहा कि- “ये जो मुसीबत है उसका कारण विद्यार्थी कम है। सबसे पहला दोष है उसके परिवार के लोगों का। उसको अच्छा आर्टिस्ट बनना है, बहुत अच्छी ड्रॉइंग करता है। लेकिन वो कहते हैं नहीं तुम्हें इंजीनियर बनना, डॉक्टर बनना है। फिर उसमें उसका जीवन हमेशा तनाव में रहता है। तो सबसे पहले मेरी मां बाप और परिवार जनों से आग्रह है कि सबसे पहले तो आप अपने बच्चों को जानने, समझने का प्रयास कीजिए। उनकी इच्छाओं को समझिए। उनकी क्षमताओं को समझिए। उसे मॉनिटर कीजिए, हो सके तो उसकी मदद कीजिए।’

टीचर्स बच्चों में तुलना ना करें: पीएम


‘दूसरे हैं टीचर्स। स्कूल में शिक्षक ऐसे वातावरण बना देते हैं। जो 4 बच्चे होशियार होते हैं, बार-बार उनको पुचकारते हैं, बाकियों को बिल्कुल गिनते ही नहीं हैं। इससे बच्चे डिप्रेस होते हैं। टीचर्स से भी मेरी आग्रह है कि विद्यार्थियों के बीच में कोई तुलना मत कीजिए। बाकी विद्यार्थियों के सामने दूसरे को टोकना बंद कीजिए। कुछ कहना है तो उससे अलग से बात करके मोटिवेट करने के अंदाज में कहिए।”

पैरेंट्स के लिए कही ये बात

पीएम ने स्टूडेंट्स के पालकों और परिवार वालों के लिए भी कुछ सलाह दी। उन्होंने कहा- “मम्मी पापा को समझाइए कि अगर आप दुखी और थकान महसूस करेंगे तो परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे क्या? हम रोबोट नहीं हैं, इंसान हैं। मैं बच्चों के परिवार, टीचर्स सबसे कहता हूं कि बच्चों को दीवारों में बंद करके किताबों का जेलखाना बना दें तो बच्चे कभी ग्रो नहीं कर पाएंगे। उसे खुला आसमान चाहिए। उसके पसंद की कुछ चीजें चाहिए। अगर वो अपने पसंद की चीजें अच्छे से करता है तो पढ़ाई भी अच्छे से कर लेगा। परीक्षा ही सबकुछ है जिंदगी में, इस प्रकार से नहीं जीना चाहिए।”