देवरिया।एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। केंद्र ने पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्क्षता में इसके लिए एक समिति का गठनकिया गया है।दरअसल, ‘एक देश एक चुनाव’ एक प्रस्ताव है जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं के लिए होने वाले चुनावों को पूरे देश में एक साथ कराने का सुझाव दिया गया है। फिलहाल देश में लोकसभा चुनाव हर 5 साल में और विधानसभा चुनाव अलग-अलग राज्यों में 5 साल के कार्यकाल पूरे होने पर अलग-अलग सालों में होते हैं। इस प्रस्ताव के पूरे होने से सभी चुनाव पूरे देश में एक साथ संपन्न होंगे।
वन नेशन-वन इलेक्शन का प्रस्ताव क्यों लाया गया
केंद्र की तरफ से काफी दिनों से वन नेशन-वन इलेक्शन के प्रस्ताव को लाने की सुगबुगाहट थी। केंद्र द्वाराएक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि, इससे चुनाव पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनावों में 60 हजारकरोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस राशि में चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दलों द्वारा खर्च की गई राशि और चुनाव आयोगद्वारा चुनाव कराने में खर्च की गई राशि शामिल है। लॉ कमीशन ने खर्च का आंकलन कर बताया कि अगर लोकसभा चुनाव और राज्यसभा चुनाव एक साथ कराए जाते तो खर्च में काफी कमी लाई जा सकती थी।
देश की प्रशासनिक व्यवस्था नहीं होगी प्रभावित
अलग-अलग चुनाव होने से बार-बार प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी की वजह से अपने मूल काम को रोकना पड़ता है। इस तरह से चुनाव देश की प्रशासनिक गति को भी धीमा कर देते हैं। चुनाव के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है। एक साथ चुनाव होने से प्रशासनिक कार्यों में ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके साथ एक साथ चुनाव कराने के पीछे यह तर्क भी दिया गया है कि हर बार चुनाव के पहले आदर्श आचार संहिता लागू की जाती है और इस दौरान लोक कल्याण की कई, परियोजनाओं को शुरु होने का इंतजार करना पड़ता है। इससे देश के विकास की गति प्रभावित होती है। पीएम मोदी कह चुके हैं कि एक देश, एक चुनाव से देश के संसाधनों की बचत होगी। इसके साथ ही विकास की गति भी धीमी नहीं पड़ेगी।
सरकार को करनी होगी कड़ी तैयारी
देश में एक देश एक चुनाव को लागू करने के लिए सरकार को भी काफी तैयारी करनी होगी। राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल का संतुलन बनाने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। इसके साथ हीलोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के साथ-साथ अन्य संसदीय प्रक्रियाओं में भी संशोधन करना होगा। एक देश-एक चुनाव को लागू करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी साथ ही इसके लिए विरोध के स्वर भी उठेंगे। क्योंकि राज्य स्तर और केंद्र स्तर के चुनाव एक साथ होने से स्थानीय मुद्दों को महत्व नहीं मिलेगा जो सिर्फ विधानसभा चुनाव होने से मिलता था। ऐसे में जनप्रतिनिधियों के पास भी अपनी बात रखने का वो मौका नहीं रहेगा जो अलग-अलग चुनाव होने पर मिलता है। इसके साथ ही मतदाता केंद्र में जिस दल को चुनना चाहेंगे वही दल राज्य के लिए भी चुने जाने की संभावना होगी।
विशेष सत्र के दौरान पेश होने की संभावना
गुरुवार को संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने संसद के विशेष सत्र बुलाए जाने की जानकारी दी। यह विशेष सत्र 18 सितंबर से 22 सितंबर तक 5 दिवसीय होगा। अब एक राष्ट्र, एक चुनाव के लिए समिती बनने के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसी विशेष सत्र के दौरान सत्ता पक्ष इस प्रस्ताव को भी सदन में रखेगा।
अभी से विरोध में विपक्ष
सरकार ने केवल एक देश-एक चुनाव के लिए समिति का गठन किया है और विपक्षी दलों ने इसके विरोध में बयान देना शुरू कर दिया । ‘एक देश एक चुनाव’ पर आम आदमी पार्टीकी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि- “सरकार डर गई है।आइएनडीआइए गठबंधन की पहली दो बैठकों के बाद उन्होंने एलपीजी की कीमतें 200 रुपये कम कर दीं। अब, वे संविधान में संशोधन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद वे आगामी चुनाव हार जाएंगे।” वहीं कांग्रेस नेता आरिफ नसीम खान ने कहा कि- “ऐसा कभी नहीं हुआ कि पूर्व राष्ट्रपति को इस तरह की कमेटी में शामिल किया गया हो। मोदी सरकार में लोकतंत्र के लिए कोई जगह नहीं बची है।”
सीएम योगी आदित्यनाथ वन नेशन-वन इलेक्शन के समर्थन में
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- “जैसे एक समृद्ध लोकतंत्र के लिए राजनीतिक स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसी ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारों की स्थिरता के साथ-साथ विकास केलिए भी एक गतिमान सरकार चाहिए और इस देश में वन नेशन वन इलेक्शन इस दिशा में एक अभिनंदनीय प्रयास है। हमें यह जानकर प्रसन्नता है कि वन नेशन, वन इलेक्शन केलिए जो कमेटी बनी है उसके अध्यक्ष माननीय श्री रामनाथकोविंद जी हैं। इस अभिनव पहल के लिए देशकी सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य की तरफ से माननीय प्रधानमंत्री जी का आभार। वन नेशन, वन इलेक्शन आज की आवश्तयता है। बार-बार इलेक्शनविकास में बाधा पहुंचती है। इलेकशन की प्रक्रिया करीब डेढ़ महीने का समय लेती है। इस दौरान विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में बाधा पहुंचाती है। इसके लिए आवश्यक है लोक सभा, राज्य सभा और सभी चुनावों को एक साथ आयोजित किया जाए। लोकतंत्र की समृद्धि और स्थिरता केलिए यह अभिनंदनीय पहल है। मैं इसका स्वागत करता हूं।”