देवरिया। केंद्र की सत्ता पर काबिज एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है। बुधवार को उन्होंने संसद भवन में जाकर औपचारिक तौर पर अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस दौरान उनके साथ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। नामांकन के वक्त का नजारा खास था सबसे आगे पीएम मोदी चल रहे थे, उनके ठीक पीछे राधाकृष्णन थे और बगल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दिखाई दे रहे थे।
नामांकन से पहले प्रेरणा स्थल पहुंचे
नामांकन दाखिल करने से पहले राधाकृष्णन संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पहुंचे और वहां मौजूद महान नेताओं की प्रतिमाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने नमन किया और उसके बाद अन्य हस्तियों को भी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके साथ बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।
विपक्ष ने उतारा पूर्व जज
उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए की ओर से राधाकृष्णन का चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है क्योंकि संसद में सत्तारूढ़ दल का संख्याबल ज्यादा है। हालांकि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक ने भी अपने उम्मीदवार का ऐलान किया है। विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और गोवा के पूर्व लोकायुक्त बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार मुकाबले को “दक्षिण बनाम दक्षिण” कहा जा रहा है, क्योंकि राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं जबकि रेड्डी का ताल्लुक तेलंगाना से है।
पीएम मोदी की मौजूदगी बनी खास बात
नामांकन दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री मोदी खुद मौजूद रहे, जो इस बात का संकेत है कि बीजेपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी को कितनी गंभीरता से ले रही है। मंच पर एनडीए के अन्य दिग्गज नेता भी जुटे और इस मौके को ऐतिहासिक बताया। सदन में एनडीए के सदस्यों की संख्या के हिसाब से अनुमान लगाया जाए तो राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपत बनकर आना लगभग तय माना जा रहा है।
कौन हैं सी.पी. राधाकृष्णन?
राधाकृष्णन फिलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान दो बार तमिलनाडु के कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने लंबे समय तक तमिलनाडु में पार्टी की कमान भी संभाली। 2016 से 2020 तक वह अखिल भारतीय नारियल रेशा बोर्ड के अध्यक्ष रहे और उनके कार्यकाल में नारियल रेशे के निर्यात में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई। उनके समर्थक उन्हें प्यार से “पचाई तमिल” यानी “सच्चा तमिल” कहकर बुलाते हैं।