देवरिया।इसरो के मिशन चंद्रयान-3 को सफलता मिलने के बाद दुनियाभर में भारत का नाम हो रहा है। भारत और इसरो को पूरी दुनिया बधाई संदेश दे रही है। विक्रम लैंडर की सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद इसरो ने चंद्रमा से ली गई लैंडिग साइट की ताजा तस्वीरें भी साझा की हैं। इस तस्वीर में जहां विक्रम चांद पर उतरा है, उस साउथ पोल की सतह दिखाई दे रही है। लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर भी चांद पर चहलकदमी करने लगा है।


चंद्रयान-3और MOX-ISTRAC आपस में कनेक्ट
चंद्रयान के लैंडर के सफलता पूर्वक लैंडिंग के कुछ समय बाद ही इसरो ने चंद्रयान-3 और MOX-ISTRAC, बेंगलुरुके बीच कम्युनिकेशन लिंग स्थापित होने की खबर ट्विटर पर शेयर की ।इसरो के मिशन में ISTRAC औरMOX महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही एक और ट्विट में इसरो की तरफ से लैंडर के द्वारा ली गई ताजा तस्वीरें भी शेयर की गई हैं।ISTRAC और MOX मिशन की ट्रैकिंग और पल-पल की निगरानी करने में मदद करते हैं।

इसरो ने ट्वीट की लैंडिंग के बाद की तस्वीरें
सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद लैंडर ने चंद्रमा से तस्वीरें भेजी, जिसे इसरो ने ट्विटर पर साझा किया और लिखा-“नीचे उतरते समय ली गई लैंडर हॉरिजॉन्टल वेलोसिटी कैमरे की तस्वीरें यहां दी गई हैं। एक और तस्वीर शेयर कर इसरो ने तस्वीर के बारे में बताया कि लैंडिंग के बाद लैंडिंग इमेजर कैमरे से ली गई तस्वीर, इसमें चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट का एक हिस्सा दिखाया गया है। एक पैर और उसके साथ की परछाई भी दिखाई दे रही है। चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर अपेक्षाकृत समतल क्षेत्र चुना है।


मिशन में ISTRAC क्या काम करता है
बेंगलुरु में स्थापित ISTRAC केंद्र किसी उपग्रह या रॉकेट के प्रक्षेपण से लेकर सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने और उसकी पूरी लाइफटाइम ट्रैकिंग और कमांड करता है। ISTRAC ने बेंगलुरु, लखनऊ, मॉरिशस, श्रीहरिकोटा, पोर्ट ब्लेयर, ब्रुनेई, इंडोनेशिया के बियाक, तिरुवनंतपुरम और डीप स्पेस नेटवर्क स्टेशनों के ग्राउंड स्टेशंस का एक नेटवर्क स्थापित करके रखा हुआ है। जिनके माध्यम से ISTRAC सैटेलाइट से कनेक्टेड रहता है।

MOX क्या होता है
MOX, ISTRAC के अंदर ही एक मिशन नियंत्रण और विश्लेषण कक्ष है, जो 24 घंटे स्पेशशिप की निगरानी करता है। अभी ISTRAC में ही दो MOX यानी नियंत्रण कक्ष हैं। मिशन चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के बाद से ही चंद्रयान की सभी एक्टिविटी और सही तरह से उड़ान के लिए आवश्यक स्टैंडर्ड को मॉक्स के वैज्ञानिक ही नियंत्रित कर रहे हैं। एक यान की निगरानी के लिए करीब 100 वैज्ञानिक दिन-रात लगे होते हैं।