देवरिया। देवरिया जिले में शुक्रवार को विभिन्न वर्गों और कानून से जुड़े लोगों की बैठक हुई। बैठक में देश और इलाके से जुड़ी कई समस्याओं पर चर्चा की गई। साथ ही जिलाधिकारी देवरिया के माध्यम से इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल को पत्र भी लिखा। पत्र में चार अलग-अलग मांगों का जिक्र किया गया है जो इस प्रकार हैं।
नए कानून को लेकर जताई चिंता
बैठक में नए तीन आपराधिक कानूनों को लेकर कई प्रकार की चिंताएं व्यक्त की गईं। बैठक में शामिल लोगों का कहना था कि-“तीनों नए कानूनों के संबंध में समाज के विभिन्न वर्गों और कानूनी बिरादरी की ओर से कई चिंताएं व्यक्त की गई हैं। उदाहरण के रूप में, इन कानूनों में कई कठोर प्रावधानों ने नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी नागरिक स्वतंत्रता को अपराध घोषित कर दिया है। विशेष रूप से बोलने की स्वतंत्रता, इकट्ठा होने का अधिकार, एकजुट होने का अधिकार, प्रदर्शन करने का अधिकार और अन्य नागरिक अधिकार। पुलिस की मनमानी शक्तियां बढ़ा दी गई हैं, जिससे देश में नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों पर असर पड़ेगा। ये कानून औपनिवेशिक काल के कानूनों से भी ज्यादा दमनकारी बना दिये गए हैं। इन कानूनों को बिना किसी चर्चा या संसदीय परीक्षण के अनुचित जल्दबाजी में पारित कर दिया गया। इनके पारित किए जाने के समय 146 विपक्षी सांसद निलंबित थे।”
देवरिया जिले में बंद चीनी मिल को शुरु करने की मांग
बैठक में दूसरा मुद्दा देवरिया में बंद पड़ी चीनी मिल को फिर से शुरु करने का था। पत्र के माध्यम से कहा गया कि- “उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा बार-बार आश्वासन और वादा किया गया है कि देवरिया जिले में बंद चीनी मिल को चालू करवायेंगे । लेकिन वर्षों से जनता की इस मांग की अनदेखी की जा रही है।”
चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा की फिर से हो स्थापना
बैठक में अगली मांग चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को फिर से स्थापित करने की रखी गई थी। मांग को लेकर कहा गया कि- “कुछ वर्ष पहले ही प्रशासन द्वारा देवरिया जिले में महाराजा अग्रसेन इंटर कालेज मोड़ से शिव मंदिर चौक के बीच स्थापित अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा को हटा दिया गया है । आज तक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा को उचित स्थान पर पुनः स्थापित नहीं की गई।”
यूएपीए कानून का विरोध
सरकार पर आरोप लगाया गया कि- “सरकार जनविरोधी नीतियों का विरोध दर्ज करवाने वाले समाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं को चुप कराने के लिए यूएपीए जैसे दमनकारी जनविरोधी काले कानून में फंसाकर जेल में बंद कर रही है।” इन सभी मुद्दों पर चर्चा के बाद ये 4 मांगे स्पष्ट की गईं-
1. केंद्र सरकार तीन आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर विराम लगाए। उन्हें उचित परीक्षण और विचार-विमर्श के लिए संसद में फिर से पेश करें।
2. यूएपीए जैसे दमनकारी जनविरोधी कानून को वापस लिया जाए।
3. यथाशीघ्र देवरिया बैतालपुर चीनी मिल को नवीनीकृत रूप से चलवाने की कोशिश की जाए।
4. अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा को पुनः स्थापित कराया जाए।