Makar Sankranti 2026: Sankranti will be celebrated on January 15thMakar Sankranti 2026: Sankranti will be celebrated on January 15th

देवरिया। भगवान सूर्य के राशि परिवर्तन का पर्व मकर संक्रांति इस बार 14 की जगह 15 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्यदेव 14 जनवरी की रात 9 बजकर 39 मिनट पर धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे और उत्तरायण होंगे। क्योकि संक्रांति रात्रि में हो रही है, इसलिए इसका पुण्यकाल अगले दिन सूर्योदय के बाद प्राप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार संक्रांति का पुण्यकाल संक्रांति समय से 16 घंटे आगे तक रहता है। यही कारण है कि इस बार संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय से लेकर दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक का समय स्नान-दान के लिए शुभ माना गया है ।

क्यों बनी भ्रम की स्थिति ?

कुछ पंचांगों में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट बताया गया है और उसी दिन शाम तक पुण्यकाल मान लिया गया है। इसी कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि मकर संक्रांति अंग्रेजी तारीख पर नहीं, बल्कि सूर्य के वास्तविक गोचर पर निर्भर करती है। जबकी कई प्रामाणिक ग्रंथों में बताया गया है कि संक्रांति रात्रि में हो, तो पर्व अगले दिन मनाना ही शास्त्रसम्मत होता है।

तिल द्वादशी और वृद्धि योग का संयोग  

इस साल मकर संक्रांति पर खास शुभ संयोग बन रहा है। पर्व के दिन माघ कृष्ण द्वादशी यानी तिल द्वादशी भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु से तिल की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए तिल का दान और सेवन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसके साथ ही इस दिन वृद्धि योग भी बन रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। इन शुभ योगों के कारण इस बार मकर संक्रांति का पुण्यफल कई गुना बढ़ गया है।

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

मान्यतानुसार मकर संक्रांति पर स्नान और दान के लिए सूर्योदय काल श्रेष्ठ माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त को सर्वोत्तम कहा गया है। ऐसे में 15 जनवरी की सुबह स्नान कर तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र आदि का दान करना शुभ रहेगा। पुण्यकाल दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। साथ ही इस दिन खिचड़ी दान का भी महत्व बताया गया है। खिचड़ी के दान से ग्रह दोष का निवारण होता है। चावल और उड़द दाल का दान शुभ होता है। संक्रांति के दिन द्वादशी तिथि होने के कारण दान का महत्व दोगुना हो जाएगा।

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