देवरिया। 30 जुलाई को वायनाड में लैंडस्लाइड ने सैंकड़ों जिंदगियां लील ली। इस आपदा से हुई भारी तबाही को लेकर राहत और बचाव कार्य अब भी जारी है। इसी बीच सोशल मीडिया में वायनाड में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की एक तस्वीर जमकर वायरल हो रही है। इस तस्वीर के वायरल होन की वजह एक महिला आर्मी ऑफिसर हैं जिन्होंने वो कर दिखाया जिसे करने में अच्छे-अच्छे अपने हाथ खड़े कर सकते हैं। आइए जानते हैं ये महिला अधिकारी कौन हैं और किस वजह से चर्चे में हैं।
आनंद महिंद्रा ने भी की तारीफ
मेजर सीता शेलके वायनाड के रेस्क्यू ऑपरेश में शामिल आर्मी का हिस्सा हैं। इन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर 16 घंटे में उफनती नदी पर पुल बनाने के असंभव काम को संभव कर दिखाया है। दरअसल वायनाड में सैलाब के साथ बह कर आए बड़े-बड़े पत्थर और चट्टानों से इरुवाझिंजिपुझा नदी पर बने पुल को पुरी तरह से तबाह कर दिया था। पुल ना होने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। पुल बनते ही रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी आ गई। सीता शेलके के इस काम के लिए उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनकी तरीफ की है।
कौन हैं सीता शेलके
मेजर सीता शेलके महाराष्ट्र के अहमद नगर की रहने वाली हैं, उन्होंने साल 2012 में इंडियन आर्मी को ज्वॉइन किया था। मेजर सीता शेलके ने चेन्नई ओटीए से ट्रेनिंग की है। सीता शेलके अभी बेंगलुरु के भारतीय सेना के मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप में मेजर का पद संभाल रही हैं। आपको बता दें फिलहाल इस पद पर वो अकेली महिला ऑफिसर हैं।
लगातार काम कर बनाया पुल
सीता शेलके और उनकी टीम ने इस ब्रिज का निर्माण 31 जुलाई को रात 9.30 बजे शुरु किया और 1 अगस्त को शाम 5.30 बजे पुल बनकर तैयार था। सेना ने पहले अपने वाहनों को गुजारकर इस पुल की मजबूती की टेस्टिंग की उसके बाद इसपर से होकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु किया। इस पुल से अब दो आपदा प्रभावित गांव चूरलमाला और मुंडक्काई को जुड़ गए हैं। पुल इतना मजबूत बनाया गया है कि इससे 25 टन वजनी वाहन को गुजार कर इसकी मजबूती की जांच की गई है।