देवरिया। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में उनके विवाहोत्सव की रस्में पूरे विधि-विधान और भक्तिमय माहौल के बीच शुरू हो गई हैं। महंत आवास पर शगुन की हल्दी के साथ आयोजनों का शुभारंभ हुआ, जहां शंखनाद, डमरू की डम-डम और मंगलगीतों से वातावरण शिवमय हो उठा। शुक्रवार शाम लिंगिया महाराज के नेतृत्व में विशेष शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान 52 थालों में सजी हल्दी, चंदन, फल, मेवा और मांगलिक सामग्री महंत आवास पहुंचाई गई। डमरू की गूंज और शंखध्वनि के बीच जैसे ही शगुन की हल्दी महंत आवास पहुंची, वहां हल्दी की रस्म विधिवत शुरू हो गई।

भक्तों ने चढ़ाई हल्दी, हुआ विशेष श्रृंगार

महंत आवास पर मौजूद शिवभक्तों ने बाबा की पंचबदन प्रतिमा पर हल्दी अर्पित की। हल्दी अनुष्ठान के बाद पंचबदन प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। पारंपरिक आभूषणों, पुष्पमालाओं और नवरत्न जड़ित छत्र के साथ बाबा का विधिवत पूजन संपन्न कराया गया। इस दौरान 11 वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के साथ पूरे अनुष्ठान को पूरा किया गया।

महाशिवरात्रि पर निकलेगी भव्य शिव बारात

रविवार, 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी में बाबा विश्वनाथ की भव्य बारात निकाली जाएगी। इस बार बाबा राजश्री स्वरूप में दर्शन देंगे। बारात में देवी-देवताओं के साथ भूत, पिशाच और काशीवासी भी बाराती बनकर शामिल होंगे। परंपरा के अनुसार सुबह शिव बारात और रात्रि में भगवान भोले का माता गौरा के साथ विवाह संपन्न होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। रंगभरी एकादशी पर माता गौरा का गवना कराया जाएगा और काशीवासी बाबा संग होली खेलेंगे, यह परंपरा सदियों से अनवरत चली आ रही है।

26 घंटे खुले रहेंगे कपाट

महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के कपाट 26 घंटे तक खुले रहेंगे। 15 फरवरी की सुबह 4 बजे मंगला आरती के बाद कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस दिन श्रद्धालु झांकी दर्शन, शिव बारात दर्शन और जल अभिषेक कर सकेंगे। इस खास मौके पर काशी विश्वनाथ के कपाट 16 फरवरी की सुबह 6 बजे तक दर्शन के लिए खुले रहेंगे।

27 फरवरी को मां पार्वती का गौना

महाशिवरात्रि के बाद 27 फरवरी को बाबा विश्वनाथ की अचल प्रतिमा महंत आवास से मंदिर तक माता गौरा के गौना के लिए भेजी जाएगी। इस अवसर पर भी काशी में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। महादेव के विवाहोत्सव की शुरुआत के साथ ही काशी पूरी तरह शिवभक्ति में डूब गई है। प्रशासन और मंदिर न्यास श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है।

शिवरात्री पर अभिषेक का शुभ मुहुर्त

ज्योतिषाचार्य प्रिया जोशी के अनुसार शिवरात्री के शुभ अवसर पर अगर आप मंदिर में जलाभिषेक करने जाना चाहते हैं तो दिन का कोई भी समय चुन सकते है। लेकिन अगर पूरे विधि विधान से रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो रात्रि का समय उत्तम होगा। शिवरात्री में चार पहर के रुद्राभिषेक का खास महत्व माना जाता है। चारों पहर के लिए शुभ मुहुर्त इस प्रकार है।

प्रथम पहर- शाम 7 बजे से 9 बजे तक

द्वितीय पहर- रात 10 बजे से 12 बजे तक

तृतीय पहर- रात 1 बजे 3 बजे तक

चतुर्थ पहर- सुबह 4 बजे से 6 बजे तक