Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar passes awayमहाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत: अजीत पवार (1959-2026)

देवरिया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार (maharashtra Deputy Cm Ajit pawar) का आज बुधवार 28 जनवरी 2026 की सुबह विमान हादसे में निधन हो गया। विमान पुणे के बारामती में लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। उस समय पवार के निजी विमान में 5 लोग सवार थे। इन सभी 5 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 2 पायलट, 1 पीएसओ और 1 सहायक थे। महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे कद्दावर और अनुभवी नेताओं में शुमार उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

बारामती से ही शुरू हुआ था पवार के ‘पावर’ का सफर

अजीत पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवरा में हुआ था। उनके पिता अनंतराव पवार प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। अजीत पवार ने अपनी प्राथमिक शिक्षा देओलाली प्रवरा से पूरी की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए मुंबई आ गए। हालांकि, अपने चाचा शरद पवार के राजनीतिक बढ़ते कद और परिवार की जिम्मेदारी के कारण वे जल्द ही सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हो गए। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान अपने कड़े अनुशासन और प्रशासनिक पकड़ से बनाई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सहकारी समितियों से की और जल्द ही बारामती के विकास पुरुष के रूप में उभरे।

7 बार विधायक और 6 बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने

अजीत पवार के नाम महाराष्ट्र की राजनीति में कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं। वे 7 बार विधानसभा चुनाव जीते और बारामती को अपना अभेद्य किला बनाया। वे महाराष्ट्र के इतिहास में सबसे अधिक 6 बार उपमुख्यमंत्री बनने वाले एकमात्र नेता थे। सिंचाई, वित्त और बिजली जैसे विभागों में उनके द्वारा किए गए सुधारों को आज भी याद किया जाता है।

  • उपलब्धिया‍ं
  • 1982: पहली बार चीनी सहकारी समिति के बोर्ड में चुने गए।
  • 1991: पुणे जिला सहकारी बैंक (PDCC) के अध्यक्ष बने, जहाँ उन्होंने 16 वर्षों तक काम किया।
  • 1991: में ही वे बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन बाद में शरद पवार के लिए अपनी सीट छोड़ दी और महाराष्ट्र की राजनीति में लौट आए। तब से वे लगातार बारामती विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

एनसीपी का विभाजन और आखिरी पारी

साल 2023 में अजीत पवार ने एक बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में विभाजन किया और NDA सरकार में शामिल हो गए। चुनाव आयोग ने उन्हें ही असली ‘NCP’ का नेता माना और ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया। अपनी मृत्यु के समय वे महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री के तौर पर सक्रिय थे और आगामी चुनावों की तैयारियों के लिए ही बारामती जा रहे थे।

दादा का निधन एक युग का अंत

महाराष्ट्र की राजनीति में प्यार से ‘दादा’ कहे जाने वाले अजीत पवार ने दशकों तक राज्य की राजनीति की धुरी बनकर काम किया है। वे केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि वे अपनी स्पष्टवादिता और ‘तुरंत काम’ करने के अंदाज के लिए जाने जाते थे। प्रशासन पर उनकी जैसी पकड़ बहुत कम राजनेताओं में देखी गई है। उनके निधन से बारामती और पूरे महाराष्ट्र ने एक ऐसा नेतृत्व खो दिया है जिसकी भरपाई होना नामुमकिन है।

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