देश में इस समय लंपी वायरस पशुओं के लिए काल बना हुआ है। अब तक अलग-अलग प्रदेशों को मिलाकर करीब 70 हजार पशुओं की मौत हो चुकी है और हर रोज आंकड़े बढ़ रहे हैं। राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में इसका सबसे खतरनाक रूप देखने को मिल रहा है। लंपी वायरस पशुओं में होने वाले संक्रामक रोगों में से एक है। यही कारण है कि पशुओं के बीच ये बहुत तेजी से फैल रहा है। समय पर इसका इलाज और रोकथाम बहुत जरूरी है नहीं तो इसका परिणाम और भी भयानक हो सकता है।

क्या है लंपी वायरस
लंपी वायरस को एक वायरल डिजीज बताया जा रहा है जो कैप्रीपॉक्स नामक वायरस के चलते होता है। संक्रामक होने के कारण पहले से लंपी वायरस से पहले से पीड़ित पशु के संपर्क में आने वाले पशुओं में ये तेजी से फैलता है। अब तक देखा गया है कि यह वायरस खून चूसने वाले कीड़ों जो अक्सर पशुओं के शरीर में पाए जाते हैं और मच्छर की कुछ प्रजातियों से एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है।

पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण
वैसे तो लंपी वायरस से संक्रमित पशुओं में कुछ दिन कोई भी लक्षण नहीं दिखते इसलिए तुरंत इसकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल है। संक्रमित होने के लगभग 7 दिनों के बाद पशुओं को बुखार आने लगता है और वे सुस्त हो जाते हैं। पैरों में सूजन आ जाती है और आंखों से पानी और मुंह से लगातार लार निकलने लगता है। पशुओं का वजन कम होने लगता है और पूरे शरीर पर छोटे-छोटे घाव जैसे उभरे हुए निशान दिखाई देने लगते हैं। दूध दे रहे पशुओं का दूध भी बंद हो जाता है। अब तक गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों में इसका सबसे ज्यादा फैलाव देखा गया है।



वायरस से पशुओं को कैसे बचाएं
संक्रमित होने के बाद यह वायरस तेजी से फैलता है इसलिए बेहतर है कि कुछ सावधानियां रखकर पशुओं को संक्रमित होने से बचाया जाए। कुछ बातों का ध्यान रखकर हम पशुओं को इस वायरस से संक्रमित होने से बचा सकते हैं।

· किसी भी एक पशु में लक्षण दिखने पर तुरंत उसे बाकी पशुओं से अलग करें और पशु चिकित्सक से संपर्क करें
· पशुओं को मक्खी, मच्छर, जू आदि परजीवियों से बचा कर रखें।
· संक्रमित इलाके में कीटाणुनाशक का छिड़काव करें
· लंपी से मृत पशु के शव को खुले में ना छोड़े बल्की गहरा गड्ढा करके उसे दफना दें।
· डेयरी विभाग की ओर से टीका आ गया है। ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण ही रोग की रोकथाम कर सकता है।



आयुर्वेदिक इलाज अपना रहे ग्रामीण
बहुत से गांवों में और गौशाला में आयुर्वेद की मदद से लंपी वायरस का इलाज किया जा रहा है। पशुओं के रहने वाले स्थान में नीम के पत्ते का धुंआ किया जा रहा है ताकि मच्छरों से बचाव किया जा सके, साथ ही पशुओं को नीम और फिटकरी वाले पानी से नहलाया जा रहा है। कुछ पशुपालक अपने पशुओं को अश्वगंधा, पान, कालीमिर्च, नमक, चिरायात, गिलोय और गुड़ आदी आयुर्वेदिक सामाग्रियों को मिलाकर लड्डू तैयार कर खिला रहे हैं। हालांकी इन लड्डूओं को विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही तैयार किया जा रहा है।

लंपी वायरस से इंसानों को कितना खतरा
लंपी वायरस से अभी तक इंसानों के संक्रमित होने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। केवल पशुओं में ही इस वायरस का असर देखा गया है। फिर भी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वायरस के संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने से बचना चाहिए, संक्रमित पशुओं को खुले हाथों से छूने से बचना चाहिए और उनके संपर्क में आते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और बाद में साबुन से अच्छी तरह हाथ पैर धोकर ही कोई दूसरा काम करना चाहिए।

दूध को अच्छी तरह उबाल कर करें उपयोग
हालांकि लंपी वायरस का मनुष्यों पर अब तक कोई सीधा-साधी प्रभाव नहीं दिखा है फिर भी सावधानी जरूरी है इसके लिए हमें दूध को अच्छी तरह पका कर ही उपयोग में लाना चाहिए। माना जा रहा है अगर दूध में किसी तरह से यह वायरस आ भी जाता है तो उबालने से वायरस खत्म हो जाएगा। फिलहाल किसी भी हालत में कच्चे दूध का उपयोग ना करें तो बेहतर होगा।