देवरिया। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं। बीजेपी इस बार अपने 400 पार के नारे को तो सही साबित नहीं कर पाई लेकिन केंद्र में NDA की सरकार बनती जरूर नजर आ रही है। कई राज्य और लोकसभा की सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी ने बड़ा दांव खेला था और वहां पर उनका दांव एकदम सही जगह पर जाकर लगा है। वहीं कई सीटें ऐसी हैं जहां पर उम्मीद से बिल्कुल परे हार का सामना करना पड़ा है। आइए जानते हैं बीजेपी की वो ‘हॉट सीट्स’ कौन-कौन सी रहीं और उन सीटों में से कहां-कहां बीजेपी का फैसला सहीं साबित हुआ।

मध्यप्रदेश में ‘मामा’ ने दिलाई रिकॉर्ड मतों से जीत
लोकसभा चुनाव के नतीजों में मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। प्रदेश में ना तो कांग्रेस का और ना ही किसी दूसरे दल का खाता खुला। भाजपा ने प्रदेश के मामा कहलाने वाले पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को विदिशा से प्रत्या शी बनाया था। यहां पर शिवराज सिंह चौहान ने रिकॉर्ड 8 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिले की है। शिवराज सिंह चौहान ने 11 लाख 16 हजार 460 वोट हासिल किए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी प्रताप भानु शर्मा को 2 लाख 95 हजार 52 मत ही मिले। शिवराज सिंह चौहान ने अब तक अपनी सारी जिम्मेदारियां बखूबी निभाई है। पार्टी के प्रति समर्पित होने के साथ ही प्रदेश की जनता के भी वो सबसे लोकप्रिय नेता है। विधानसभा चुनावों में जीत के बाद लोकसभा चुनावों में भी प्रचंड जीत हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया है कि एमपी की जनता उन्हें मामा सिर्फ कहती नहीं बल्की मानती भी है ।


हिमाचल की मंडी सीट पर कंगना का चला जादू
हिमाचल की मंडी लोकसभा सीट पर बीजेपी ने बॉलिवुड क्विन कंगना रनौत को अपना प्रत्याशी बनाया था और उन्होंने ने पहली बार में ही खुद को साबित कर दिया। मंडी में कंगना रनौत को भारी मतों के अंतर से जीत मिली है। उनका मुकाबला हिमाचल के 6 बार सीएम रह चुके वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह से था। विक्रमादित्य सिंह हिमाचल के लोक निर्माण मंत्री रह चुके हैं फिर भी पहली बार राजनीति में कदम रख रही कंगना ने उन्हें कड़ी टक्कर देते हुए जीत का परचम लहरा दिया है। जीत के बाद कंगना ने इंस्टाग्राम पोस्ट कर पार्टी और जनता का आभार व्यक्त किया है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा – “मंडी के सभी वासियों का इस जनाधार, प्यार और विश्वास के लिए तहे दिल से आभार व्यक्त करती हूं। ये जीत आप सभी की है, ये जीत है प्रधानमंत्री मोदी जी की और भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास की, सनातन की और मंडी के सम्मान की।”

दिल्ली में बांसुरी स्वराज ने दिलाई जीत
राजधानी की नई दिल्ली लोकसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार बांसुरी स्वराज को भारी बहुमत से जीत मिली है। बांसुरी स्वराज पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी हैं। उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। बांसुरी स्वराज को चार लाख से ज्यादा वोट मिले हैं जबकी उनके प्रतिद्वंदि सोमनाथ भारती को करीब साढ़े तीन लाख वोट मिले हैं।

अमेठी में स्मृति ईरानी को केएल शर्मा ने दी शिकस्त
उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट सबसे हॉट सीट्स में से एक हैं यहां पर चुनाव परिणाम चौकाने वाले हैं। स्मृति ईरानी को कांग्रेस प्रत्याशी केएल शर्मा से हार का सामना करना पड़ा। के एल शर्मा जिनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नहीं था उन्होंने बीजेपी की कद्दावर नेता मानी जाने वाली स्मृति ईरानी को मात देकर सबको सकते में ला दिया है। कांग्रेस ने अंतिम समय में राहुल गांधी के पीए और गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाने वाले के एल शर्मा का नाम का ऐलान कर सबको चौका दिया था। के एल शर्मा काफी लंबे समय से अमेठी में कार्यरत हैं और क्षेत्रीय स्तर पर उनका काफी नाम और पहचान है। लोकल लोगों के बीच के एल शर्मा की छवि भी काफी प्रतिष्ठित है। कांग्रेस का यह दांव बिल्कुल सटीक बैठा और अमेठी जैसी महत्वपूर्ण सीट पर कांग्रेस ने अपना झंडा गाड़ दिया है।

कौन हैं के एल शर्मा
केएल शर्मा लंबे समय से गांधी परिवार के करीबी रहे हैं। पिछले चार दशकों से केएल शर्मा गांधी परिवार की तरफ से सांसद प्रतिनिधि के रूप में काम करते आ रहे हैं। केएल शर्मा यानी की किशोरी लाल शर्मा मूल रूप से लुधियाना के रहने वाले हैं। 1983 में राजीव गांधी ने उन्हें पार्टी कार्यकर्ता के रूप में अमेठी बुलाया था। उसके बाद से ही केएल शर्मा अमेठी में ही गांधी परिवार के लिए काम करते आ रहे हैं। लंबे समय से अमेठी में कांग्रेस के लिए काम कर रहे शर्मा की इस क्षेत्र में काफी पकड़ मानी जाती है। शर्मा गांधी परिवार के बेहद खास और विश्वसनीय लोगों में से माने जाते हैं।

हैदराबाद से माधवी लता को मिली हार
इस चुनाव में हैदराबाद लोकसभा सीट पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई थी। ओवैसी का गढ़ माना जाने वाली हैदराबाद सीट पर बीजेपी ने इस बार माधवी लता को उतारा था। माधवी लता को बीजेपी की फायर कैंडिडेट माना जा रहा था। माधवी लता एक समाजसेवी और बेहतरीन वक्ता हैं। लोकल लोगों में उनकी अच्छी पहचान है। उन्होंने ना सिर्फ हिंदुओं के लिए बल्की मुस्लिम महिलाओं के उत्थान के लिए भी काफी काम किया है। बीजेपी को और खुद उनको भी अपनी जीत का पूरा भरोसा था। लेकिन पिछले 20 सालों से हैदराबाद सीट पर बैठे ओवैसी को इस बार फिर जीत हासिल हो गई है। शुरुआती रुझानों में माधवी लता आगे नजर आ रही थीं लेकिन वोटों की गिनती आगे बढ़ने के बाद ओवैसी ने बढ़त हासिल की जो की लगातार बढ़ती ही चली गई।

कौन हैं माधवी लता
माधवी लता ने पहली बार राजनीति की दुनिया में कदम रखा है। उनका जन्म एक तेलुगु परिवार में कर्नाटक के हुगली में हुआ है। हैदराबाद में माधवी की छवि एक बड़ी और दमदार महिला समाज सेविका की है। उनकी छवि कट्टर हिंदूवादी महिला के रूप में है। माधवी विरिंची अस्पताल की चेयर पर्सन होने के अलावा हेल्थ और शिक्षा से जुड़े कई समाजिक संस्थाएं भी चलाती हैं। वो लोपामुद्रा चैरिटेबल ट्रस्ट और लतामा फाउंडेशन की प्रमुख हैं। पुराने हैदराबाद में गरीब मुस्लिम परिवारों को शिक्षा में मदद की बात हो या मुस्लिम परिवारों में बेटियों को बार-बार बेचने की प्रथा के खिलाफ आवाज उठानी हो, माधवी बिना धर्म को बीच में लाए काम करती हैं। माधवी कला के क्षेत्र से भी जुड़ी हुई हैं, वो एक प्रतिष्ठित भरत नाट्यम डांसर हैं और उन्होंन साउथ फिल्म इंडस्ट्री की कई फिल्मों में भी काम किया है।