न्यूज डेस्क: भारत की अर्थव्यवस्था बड़े आधारभूत बदलाव से गुजर रही है। अब तक Cash आधारित रही भारत की अर्थव्यवस्था में भुगतान के तरीके (Methods of payment) बदल रहे हैं। दिवाली के त्योहारी हफ्ते में यह बात तब और साफ हो गई, जब लोगों ने हमेशा की तरह खरीदारी तो खूब की, लेकिन बाजार में Cash नहीं पहुंचा। दरअसल Cash की बजाय लोगों ने Online Payment को प्राथमिकता दी। 20 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब दिवाली पर भी बाजार में Cash Flow नहीं बढ़ा क्योंकि लोगों ने Smartphone के जरिए Payment किया। 16% Payment UPI के जरिए किया गया, जबकि IMPS से 12 और E-volet से 1% Payment हुआ। 55% Payment NEFT के जरिए किया गया। इस साल अक्टूबर में ही 12 लाख करोड़ रुपए UPI Payment किए गए। इससे पहले साल 2009 में भी दिवाली सप्ताह में बाजार में कम कैश पहुंचा था, लेकिन तब दुनिया भर में चल रही मंदी वजह बताई गई थी। जहां Financial Year 2016 में भारत के 88% लेन-देन कैश में किए जाते थे, वहीं इस साल 2022 में यह गिरकर महज 20% पर आ गया है।
10 साल में सिर्फ 12% लेनदेन Cash में होगा
उम्मीद जताई जा रही है कि 2027 तक भारत में सिर्फ 12% लेनदेन कैश में होगा। 88% लेनदेन विभिन्न माध्यमों से Online ही होगा। यह सरकार और RBI दोनों के लिए बेहतर स्थिति है। इससे मुद्रा छापने और उसके Circulation पर आने वाला खर्च बहुत कम हो जाएगा। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जहां क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान की आदत में कोई बदलाव नहीं आया है। वहीं, यूपीआई की भुगतान में 16% की हिस्सेदारी महज 6 साल में ही हो गई। इन्हीं 6 सालों में चेक से भुगतान 46% से गिरकर 12.7% पर आ गया है।
Google-Phone pay जैसे प्लेटफॉर्म से हर महीने करीब 122 करोड़ लेनदेन हो रहा
कैश की बजाय ऑनलाइन पेमेंट से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। उनकी आय बढ़ रही है और वे नियमित कारोबार का सीधे हिस्सा बन रहे हैं। कई अनौपचारिक क्षेत्रों की फर्म की बिक्री बढ़ी है। भुगतान में आए इस बदलाव का असर भारत की बदलती अर्थव्यवस्था में साफ झलकने लगा है। भारत में Google Pay, Paytm, Phone pay, Whatsapp Pay जैसे UPI Platform पर हर महीने करीब 122 करोड़ लेन-देन होते हैं। देश की करीब 50 फीसदी आबादी ऑनलाइन लेन-देन को लेकर सहज है। केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 45 से ज्यादा मोबाइल वॉलेट और करीब 50 UPI आधारित ऐप्स हैं। दरअसल यूपीआई से पेमेंट इतना आसान और तेज है कि लोगों को कैश की जरूरत महसूस ही नहीं हो रही। इस साल 84 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन सिर्फ यूपीआई के जरिए हुआ है।
पहली बार दिवाली में Cash से ज्यादा Online खरीदारी हुई
दिवाली यानी साल का वह समय जब देश में सबसे ज्यादा खरीदारी होती है। इस मौके को भुनाने में कंपनियां भी पीछे नहीं रहतीं और तरह-तरह के ऑफर के साथ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बाजार तैयार हो जाता है। इस बार भी दो साल बाद दिवाली पर खुले बाजार में जमकर खरीदारी की गई, लेकिन 20 साल के इतिहास में यह पहली बार था, जब बाजार में कैश की कमी हो गई और यूपीआई के जरिए ज्यादा खरीदारी हुई। अक्टूबर 2022 में 12 लाख करोड़ रुपए यूपीआई से पेमेंट किए गए। इससे पहले साल 2009 में भी दिवाली सप्ताह में बाजार में कम कैश पहुंचा था, लेकिन तब दुनिया भर में चल रही मंदी वजह थी।
Smartphone based UPI payment वाली हो गई भारत की अर्थव्यवस्था
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के बैंकिंग सिस्टम (Banking System of India) में इस वक्त 54 हजार करोड़ रुपए कैश की कमी है। माना जा रहा था कि दिवाली सप्ताह में इसकी भरपाई हो जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसके बावजूद Banking System of India और भारत की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए यह बेहतर है क्योंकि इसकी मॉनिटरिंग आसानी (Easy monitoring on payments ) से हो सकती है। दरअसल Cash आधारित भारत की अर्थव्यवस्था अब स्मार्टफोन आधारित यूपीआई पेमेंट (Smartphone based UPI payment) वाली होती जा रही है। इसकी वजह से मुद्रा छापने और सर्कुलेशन में आने वाले खर्च में कमी आएगी। 55% रिटेल लेनदेन NEFT के जरिए किए गए हैं। वहीं UPI से 16%, IMPS से 12% और ई-वॉलेट से 1% लेनदेन किए गए हैं।
दुनिया हो रही भारत के यूपीआई की दीवानी
यूपीआई की शुरुआत साल 2016 में NPCI यानी नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payment Corporation of India) ने की। अब दुनिया हमारे UPI की दीवानी हो रही है। भारत से बाहर सबसे पहले भूटान में इसकी शुरुआत हुई। नेपाल, फ्रांस, सिंगापुर, यूएई और मलेशिया में भी UPI के जरिए पेमेंट होने लगा है।
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