देवरिया। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर बसा है गांव लखाईडीह (lakhaidih village)। चार पहाड़ों की गोद में बसे इस गांव में कभी किसी शख्स पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। ग्राम प्रधान कन्हू राम टुड्डू बताते हैं गांव में कोई भी किसी तरह का नशा नहीं करता। दरअसल, पूरी पहाड़ी पर महुए का एक भी पेड़ नहीं है। यही वजह है कि यहां मारपीट, चोरी, डकैती, लूटपाट जैसी कोई वारदात कभी नहीं हुई।

हां उनके गांव (lakhaidih village)से 3 किमी दू्र जिल टोला में एक बार हत्या हुई थी। उसे छोड़ दें तो पूरी पहाड़ी पर कभी कोई अपराध नहीं हुआ। यहां तक कि जब नक्सलवाद चरम पर था तब भी यहां कभी शांति भंग नहीं हुई। इसी गांव के विराम बोदरा कहते हैं कि हमने अपने घरों में कभी ताला नहीं लगाया है। 80 साल की वीरमुनी बांडरा कहती हैं कि इतनी लंबी उम्र में मैंने कभी किसी को झगड़ते नहीं देखा।

1400 फुट ऊंचाई पर बसा है गांव

समुद्र तल से करीब 1400 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस गांव (lakhaidih village) तक पहुंचने ​के लिए करीब 12 किलोमीटर के चढ़ाई वाले उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरना होता है। इसलिए सिर्फ दोपहिया ही चलते हैं। कोई सार्वजनक परिवहन नहीं है। रास्ते की तमाम मुश्किलों से जूझने के बाद गांव की सीमा पर मिलता है राजा बासा। यहां सालों भर बहने वाले झरने की आवाज बताती है कि अब हम गांव पहुंचने वाले हैं।

सफाई और दीवारों पर कलाकृतियां गांव की खासियत

गांव का हर घर साफ-  सुथरा दिखता है। दीवारों पर आदिवासी संस्कृति को दर्शाने वाली कलाकृतियों को उकेरा गया है। इनमें प्राकृतिक रंग भरे गये हैं। इस कारण ये बेहद आकर्षक दिखते हैं। तमाम झंझावातों के बावजूद वे शिक्षा को लेकर बेहद गंभीर हैं। तकरीबन 69 परिवारों के इस गांव (lakhaidih village)में ज्यादातर  ग्रेजुएट हैं। गांव में आवासीय प्राइमरी स्कूल है, जिसमें 142 बच्चे रहते हैं। लेकिन लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए करीब 40 किमी दूर घाटशिला जाना पड़ता है। गांव में अब सरकारी गेस्ट हाउस बन रहा है। गांव तक आने वाली सड़क भले ही जर्जर है, पर गांव (lakhaidih village) के अंदर चकाचक पीसीसी रोड है। पानी के बहाव के लिए नाले का भी निर्माण कराया गया है।

थाना प्रभारी बोले, मैंने ऐसा गांव कभी नहीं देखा

लखाईडीह गांव (lakhaidih village) डुमरिया थाने में आता है। इस थाने के थाना प्रभारी नासुगना मुंडा कहते हैं- लखाईडीह गांव के ग्रामीणों में जबर्दस्त एकता है। मैंने अपने जीवन में ऐसा कोई गांव अब तक नहीं देखा था। लखाईडीह में अपराध की कोई वारदात अब तक सामने नहीं आई है। यहां लोग छोटे-मोटे विवाद आपस में ही सुलझा लेते हैं।

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