देवरिया। प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने आज सोशल मीडिया पर एक ट्वीट करते हुए एशिया की पहली महिला लोको पायलट सुरेखा यादव (surekha yadav) को उनके रिटायरमेंट के अवसर पर बधाई दी। महिंद्रा के इस संदेश के बाद से ही सुरेखा यादव एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। सुरेखा यादव देश की पहली लोको पायलट हैं। आज से 37 साल पहले उन्होंने भारतीय रेलवे में पहली महिला लोको पायलट के रूप में जॉइन किया था।

आनंद महिंद्रा ने किया ट्विट

आनंद महिंद्रा ने अपने ट्वीट में लिखा- “बधाई हो सुरेखा जी (surekha yadav), आप एक अग्रदूत रही हैं। इतने लंबे समय तक लोगों की सेवा करने के बाद आपके सेवानिवृत्ति पर मेरी ओर से ढेरों शुभकामनाएं। आपने हमें याद दिलाया कि आपके जैसे ऐतिहासिक बदलाव लाने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान हमेशा होना चाहिए। आपका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।”

महाराष्ट्र की रहने वाली हैं सुरेखा यादव

सुरेखा यादव का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे पढ़ाई में तेज और मेहनती छात्रा रही थीं। उनकी रुचि तकनीकी शिक्षा की ओर थी, इसी कारण उन्होंने पॉलिटेक्निक कॉलेज से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू की और इसी दौरान उनका रुझान रेलवे की ओर हुआ। उस समय भारतीय रेलवे में महिलाओं की भूमिका सिर्फ ऑफिस वर्क तक ही सीमित थी। लेकिन सुरेखा यादव ने पायलट के रूप में कमान संभाल कर नई शुरुआत की थी।  

1988 में चलाई पहली मालगाड़ी

1986-87 में रेलवे की भर्ती प्रक्रिया के दौरान सुरेखा यादव (surekha yadav) ने असिस्टेंट लोको पायलट पद के लिए आवेदन किया। कॉम्पिटिशन टफ होने के बाद भी उनका चयन हो गया। यह चयन न केवल सुरेखा के लिए, बल्कि पूरे रेलवे इतिहास के लिए एक ऐतिहासिक पल था। ट्रेन चलाना उस दौर में बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण काम माना जाता था, जिसमें तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक दृढ़ता भी जरूरी थी। 1988 में उन्होंने अपनी पहली मालगाड़ी चलाई और इसके साथ ही एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर बनने का गौरव प्राप्त किया। यह क्षण भारतीय रेलवे के इतिहास में दर्ज हो गया।

डेक्कन क्वीन चलाने का सम्मान

सुरेखा यादव (surekha yadav) का करियर केवल मालगाड़ी तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने यात्री गाड़ियां भी चलानी शुरू कीं और अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल कीं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी प्रतिष्ठित डेक्कन क्वीन एक्सप्रेस को चलाना। यह ट्रेन मुंबई और पुणे के बीच संचालित होती है और भारतीय रेलवे की प्रमुख ट्रेनों में गिनी जाती है। इस ट्रेन को चलाना किसी भी लोको पायलट के लिए सम्मान की बात होती है, और सुरेखा ने यह सम्मान भी अपने नाम किया।

सेंट्रल रेलवे ने किया ट्विट

सुरेखा यादव 30 सितंबर को रिटायर होने जा रही हैं उनके रिटायरमेंट पर सेंट्रल रेलवे ने ट्विट किया और लिखा-

 “एशिया की पहली महिला रेल चालक श्रीमती सुरेखा यादव, 36 वर्षों की शानदार सेवा के बाद 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होंगी।

एक सच्ची पथप्रदर्शक, उन्होंने बाधाओं को तोड़ा, अनगिनत महिलाओं को प्रेरित किया और साबित किया कि कोई भी सपना अधूरा नहीं है।

उनकी यात्रा भारतीय रेलवे में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक सदैव बनी रहेगी।”