देवरिया। क्या आप भी 90 के दशक या उससे पहले पैदा हुए लोगों में से हैं, तो आपने डाकघरों में मिलने वाली रजिस्टर्ड पोस्ट की सुविधा का एक ना एक बार लाभ जरूर उठाया होगा। तब किसी जरूरी दस्तावेज या किसी सरकारी विभाग में फॉर्म जमा करना हो, तो लोग रजिस्टर्ड पोस्ट पर ही भरोसा करते थे। इसके लिए डाकघर में अलग से काउंटर होता था, रसीद मिलती थी और डिलीवरी के बाद पावती भी आती थी। यह एक भरोसेमंद और सुरक्षित तरीका माना जाता था। लेकिन अब ये सेवा बंद होने जा रही है अब रजिस्टर्ड पोस्ट एक इतिहास बनकर रह जाएगा।

1 सितंबर से बंद हो जाएगी सेवा

भारतीय डाक विभाग ने ऐलान किया है कि 1 सितंबर 2025 से रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। यानी अब कोई भी व्यक्ति या संस्था रजिस्टर्ड चिट्ठी या पार्सल नहीं भेज सकेगी। इसके बजाय डाक विभाग स्पीड पोस्ट को ही आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। विभाग का मानना है कि इस बदलाव से कामकाज ज्यादा आधुनिक, तेज और डिजिटल होगा।

सभी सरकारी विभागों को दी गई सूचना

डाक विभाग के सचिव और डायरेक्टर जनरल की ओर से सभी सरकारी कार्यालयों, अदालतों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों को सूचित किया गया है कि 31 अगस्त 2025 तक रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा पहले की तरह उपलब्ध रहेगी, लेकिन 1 सितंबर से यह बंद कर दी जाएगी, और सभी को अपने दस्तावेज स्पीड पोस्ट के माध्यम से ही भेजने होंगे।

क्यों बंद की जा रही है सेवा?

इस बदलाव के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एक तो अब रजिस्टर्ड पोस्ट का उपयोग बहुत कम हो गया है। ईमेल, व्हाट्सऐप और ऑनलाइन कम्युनिकेशन ने चिट्ठियों की जगह ले ली है। लोग पहले की तरह हाथ से चिट्ठी लिखना या उसे पोस्ट करना नहीं चाहते। दूसरी ओर, प्राइवेट कूरियर कंपनियों और ई-कॉमर्स डिलीवरी सिस्टम ने भी डाक विभाग की पारंपरिक सेवाओं को पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में डाक विभाग ने तय किया है कि अब वह अपनी ऊर्जा और संसाधन स्पीड पोस्ट को और बेहतर बनाने में लगाएगा।

रजिस्टर्ड पोस्ट से महंगी स्पीड पोस्ट सर्विस

 हालांकि, स्पीड पोस्ट सेवा रजिस्टर्ड पोस्ट के मुकाबले थोड़ी महंगी जरूर है। रजिस्टर्ड पोस्ट की कीमत करीब 25.96 रुपये से शुरू होती थी, और हर 20 ग्राम बढ़ने पर 5 रुपये अतिरिक्त लगते थे। स्पीड पोस्ट की शुरुआत 41 रुपये से होती है, जो लगभग 20-25% महंगी है। इसके बावजूद स्पीड पोस्ट में कई आधुनिक सुविधाएं हैं, जैसे कि ऑनलाइन ट्रैकिंग, तेज डिलीवरी और बेहतर रिकॉर्डिंग सिस्टम। इसी वजह से विभाग अब इसे ही आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।